ईरान-इजरायल संघर्ष से भारत में भी बढ़ी चिंता, चाबहार पोर्ट पर 4771 करोड़ रुपये का निवेश दांव पर

ईरान-इजरायल संघर्ष से भारत में भी बढ़ी चिंता, चाबहार पोर्ट पर 4771 करोड़ रुपये का निवेश दांव पर

नई दिल्ली | 20 जून 2025
ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य तनाव ने न केवल मध्य-पूर्व क्षेत्र में हलचल मचा दी है, बल्कि भारत की रणनीतिक और आर्थिक योजनाओं पर भी गहरा असर डालने की आशंका पैदा कर दी है। ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत का लगभग 550 मिलियन डॉलर (करीब 4771 करोड़ रुपये) का निवेश दांव पर लग गया है।

भारत की रणनीतिक परियोजना पर संकट

भारत ने ईरान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित चाबहार बंदरगाह के "शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल" के विकास और संचालन के लिए वर्षों से रणनीतिक भागीदारी निभाई है। यह पोर्ट भारत, ईरान और अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने और पाकिस्तान को दरकिनार करने वाली वैकल्पिक व्यापारिक राह प्रदान करने के लिए बेहद अहम माना जाता है।

मई 2024 तक भारत की स्थिति

मई 2024 तक भारत ने इस परियोजना में न केवल भारी आर्थिक निवेश किया है, बल्कि टर्मिनल का प्रबंधन भी भारतीय कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) को सौंपा गया है। यह समझौता दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को दर्शाता है।

युद्ध का संभावित प्रभाव

ईरान और इजरायल के बीच युद्ध की संभावना बढ़ने से भारत की यह रणनीतिक परियोजना बाधित हो सकती है। ऐसे में न केवल मालवाहन और लॉजिस्टिक्स प्रभावित होंगे, बल्कि भारत के मध्य एशिया तक निर्बाध व्यापार के सपने को भी झटका लग सकता है।

इसके अलावा, ईरान में अस्थिरता बढ़ने से भारतीय निवेशकों की सुरक्षा, कच्चे तेल की आपूर्ति और क्षेत्रीय भू-राजनीति पर भी असर पड़ सकता है।

भारत की रणनीतिक चुप्पी

अब तक भारत ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन कूटनीतिक सूत्रों का मानना है कि विदेश मंत्रालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है और भारत अपनी आर्थिक तथा रणनीतिक हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी विकल्पों पर विचार कर रहा है।