नई दिल्ली। प्रसिद्ध कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए अपने वीडियो को लेकर सफाई दी है। एनडीटीवी से विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि उनका पूरा वक्तव्य संदर्भ से हटाकर और अधूरा दिखाया गया, जिससे अनावश्यक विवाद खड़ा हुआ।
अनिरुद्धाचार्य के अनुसार, उनका मूल वीडियो लगभग छह मिनट का था, जबकि सोशल मीडिया पर मात्र 30 सेकंड का अंश चलाया गया। उन्होंने कहा, “छह मिनट की बात 30 सेकंड में कैसे पूरी हो सकती है? मेरी बात पुरुषों और महिलाओं, दोनों के लिए थी—सिर्फ यह कहने के लिए कि चरित्रवान बनें। गांव की भाषा में मैंने जो कहा, उसका आशय चरित्रहीनता से था, न कि किसी का अपमान करने से।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ टिप्पणियां पुराने जमाने के संदर्भ में थीं और उन्हें उसी तरह समझा जाना चाहिए। साथ ही, अनिरुद्धाचार्य ने आरोप लगाया कि सुनियोजित तरीके से सनातन धर्म को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।
लिव-इन संबंधों पर अपनी आपत्ति दोहराते हुए उन्होंने कहा, “लिव-इन को क्यों महिमामंडित किया जा रहा है? मेरी भाषा भले कठोर हो, लेकिन निशाना सही था। सनातन पर कभी बेटियों को दबाने का आरोप नहीं रहा, कुरीतियां मुगल काल में आईं।”
अखिलेश यादव की नाराजगी पर उन्होंने कहा, “वो खुद बताएं संत कैसे खुश रहें। विरोध मेरे शब्दों का नहीं, संतों का हो रहा है। रामभद्राचार्य और प्रेमानंद महाराज मेरे खिलाफ नहीं हैं।”
कथावाचक ने विरोध करने वालों को सलाह दी कि वे संतों के सत्संग में जाएं और शास्त्रों की सही व्याख्या को समझें।