जापान का ऐतिहासिक शहर Kyoto इन दिनों अत्यधिक पर्यटन दबाव से जूझ रहा है। मंदिरों, तीर्थस्थलों और पारंपरिक गलियों में उमड़ती भारी भीड़ से स्थानीय जीवन और सांस्कृतिक विरासत पर असर पड़ रहा है। हालात को देखते हुए नगर प्रशासन ने पर्यटन को नियंत्रित करने के लिए कड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं।
जापान नेशनल टूरिज़्म ऑर्गनाइज़ेशन के अनुसार, वर्ष 2024 में क्योटो में करीब 1.1 करोड़ पर्यटक पहुंचे। मौजूदा रुझानों को देखते हुए 2025 में यह आंकड़ा और बढ़ने की आशंका है। सोशल मीडिया—खासतौर पर शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म—के चलते कुछ स्थान “हॉटस्पॉट” बन गए हैं, जहां दिनभर भारी भीड़ जमा रहती है।
पर्यटन कर में बढ़ोतरी, संवेदनशील इलाकों में प्रवेश पर रोक
सरकार ने गीशाओं के कामकाजी इलाकों की गलियों में पर्यटकों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया है, ताकि पारंपरिक जीवनशैली और पेशे की गरिमा बनी रहे। इसके अलावा, मार्च से प्रति रात होटल ठहराव पर अतिरिक्त पर्यटन कर लागू किया जाएगा। ऊंचे श्रेणी के होटलों में यह कर पहले की तुलना में लगभग दस गुना तक बढ़ सकता है, जबकि कम कीमत वाले ठहराव पर भी दोगुना या चार गुना शुल्क लगेगा।
स्थानीय जीवन पर असर
पर्यटकों की भीड़ के कारण रेस्तरां और बाजारों में जगह मिलना मुश्किल हो गया है। कई परिवार-चलित दुकानों को फायदा हुआ है, लेकिन शांत और आरामदायक भोजन की तलाश करने वालों को निराशा हाथ लगती है। प्रसिद्ध निशिकी मार्केट जैसे इलाकों में हालात इतने भीड़भाड़ वाले हो गए हैं कि चलना तक चुनौती बन जाता है।
प्रशासन का संदेश
प्रशासन का कहना है कि ये कदम “कठोर” लग सकते हैं, लेकिन शहर की सांस्कृतिक धरोहर, स्थानीय निवासियों की सुविधा और पर्यटन के संतुलित विकास के लिए आवश्यक हैं। क्योटो अब वेनिस और ग्रीक द्वीपों जैसे भीड़-प्रभावित पर्यटन स्थलों की कतार में खड़ा दिखाई देता है—जहां संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती है।
सरकार ने पर्यटकों से अपील की है कि वे जिम्मेदारी से यात्रा करें, स्थानीय नियमों का पालन करें और भीड़ से बचने के लिए वैकल्पिक समय व स्थानों का चयन करें।