बॉन्डी आतंकी हमले के बाद लेबर सरकार के त्वरित सुधार विधेयक, सीनेट में भविष्य अनिश्चित

बॉन्डी आतंकी हमले के बाद लेबर सरकार के त्वरित सुधार विधेयक, सीनेट में भविष्य अनिश्चित

कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया की एंथनी अल्बानीज़ी के नेतृत्व वाली लेबर सरकार ने बॉन्डी बीच में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद हथियार और सीमा शुल्क कानूनों में सख्ती से जुड़े त्वरित सुधार विधेयक संसद में पेश कर दिए हैं। हालांकि, सीनेट में इन सुधारों का भविष्य अभी भी अनिश्चित बना हुआ है क्योंकि विभिन्न दलों के बीच बातचीत जारी है।

दिसंबर में बॉन्डी बीच पर चानुका (यहूदी धार्मिक) आयोजन के दौरान हुए आतंकी हमले में 15 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हुए थे। हमले के बाद देशभर में शोक और आक्रोश देखा गया।

विपक्ष का आरोप: असली मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश

नेशनल पार्टी के उपनेता केविन होगन ने संसद में सरकार पर “इस्लामी उग्रवाद” के मुद्दे से ध्यान हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की पहली प्रतिक्रिया हथियार कानूनों को सख्त करना थी, जबकि कट्टरपंथ, खुफिया विफलताओं और यहूदी-विरोधी गतिविधियों पर व्यापक जांच की ज़रूरत थी।

होगन ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने रॉयल कमीशन गठित करने या मौजूदा रिपोर्टों की गहन समीक्षा करने के बजाय वैध हथियार मालिकों को निशाना बनाया।

सरकार का पक्ष: सुरक्षा में खामियों को दूर करना ज़रूरी

गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने निचले सदन में विधेयक पेश करते हुए कहा कि कई ऑस्ट्रेलियाई यह जानकर हैरान हैं कि देश में अब पोर्ट आर्थर नरसंहार से पहले की तुलना में अधिक हथियार मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में वीज़ा धारकों को हथियार लाइसेंस मिलना संभव था और खुफिया एजेंसियों की जानकारी हथियार लाइसेंसिंग प्रक्रिया से पूरी तरह जुड़ी नहीं थी। नए सुधारों का उद्देश्य इन्हीं कमियों को दूर करना है।

टोनी बर्क ने कहा,
“अगर ये राष्ट्रीय सुधार पहले से लागू होते, तो बॉन्डी के हमलावरों के पास एक भी हथियार नहीं होता।”

संसद में आगे की राह

यह विधेयक प्रतिनिधि सभा में आसानी से पारित होने की संभावना है, जहां लेबर का बहुमत है। सीनेट में सरकार को ग्रीन्स का समर्थन मिल सकता है, लेकिन कुछ संशोधनों और राजनीतिक मतभेदों के कारण अंतिम मंज़ूरी अभी तय नहीं मानी जा रही।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में राष्ट्रीय सुरक्षा, हथियार नियंत्रण और चरमपंथ से निपटने को लेकर ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में तीखी बहस जारी रहेगी।