बाल सुरक्षा के लिए सख्ती: घटिया चाइल्डकेयर सेंटरों की फंडिंग रोकेगी लेबर सरकार, शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान

बाल सुरक्षा के लिए सख्ती: घटिया चाइल्डकेयर सेंटरों की फंडिंग रोकेगी लेबर सरकार, शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान

ऑस्ट्रेलिया की लेबर सरकार ने देश के चाइल्डकेयर सिस्टम में बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर बड़ा कदम उठाया है। शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर ने बुधवार को घोषणा की कि सरकार एक नया विधेयक ला रही है, जिसके तहत उन चाइल्डकेयर केंद्रों की फेडरल फंडिंग बंद की जा सकेगी, जो तय मानकों पर खरे नहीं उतरते।

यह फैसला उस सनसनीखेज मामले के बाद लिया गया है, जिसमें मेलबर्न के पॉइंट कुक स्थित ‘क्रिएटिव गार्डन अर्ली लर्निंग सेंटर’ में एक कर्मचारी जोशुआ डेल ब्राउन (26) पर 70 से अधिक यौन अपराधों के आरोप लगे हैं। इनमें बच्चों के सामने यौन गतिविधियां करना और बाल यौन शोषण सामग्री रखना जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। आरोपी के पास "वर्किंग विद चिल्ड्रन" का वैध प्रमाणपत्र भी था, इसके बावजूद वह केंद्र में कार्यरत था।

‘बच्चों को वो सुरक्षा मिलनी चाहिए, जिसके वे हकदार हैं’
शिक्षा मंत्री जेसन क्लेयर ने कहा, “जो कुछ विक्टोरिया से सामने आया है, उसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। अब ज़रूरत है कि चाइल्डकेयर सिस्टम में विश्वास बहाल किया जाए।” उन्होंने कहा कि सरकार हर साल लगभग 16 अरब डॉलर की सब्सिडी चाइल्डकेयर संस्थानों को देती है, जो औसतन एक केंद्र की लागत का 70 प्रतिशत हिस्सा होती है।

“अगर कोई केंद्र बार-बार सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों को नहीं अपनाता, तो हमारे पास अधिकार होना चाहिए कि हम उनकी फंडिंग रोक दें। यह संस्थान को बंद करने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि उन्हें बेहतर बनाने की दिशा में एक ज़िम्मेदार कदम है,” क्लेयर ने कहा।

विपक्ष का समर्थन भी मिला
इस प्रस्तावित कानून को संसद के निचले सदन में जल्द ही पेश किया जाएगा, जहाँ लेबर पार्टी के पास 94 सीटों का बहुमत है। इसे उच्च सदन (सीनेट) में भी व्यापक समर्थन मिलने की उम्मीद है। विपक्ष की नेता सुसन ले ने भी सरकार की त्वरित कार्रवाई की सराहना की और कहा, “यह मुद्दा राजनीति से ऊपर है। माता-पिता और बच्चों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।”

‘वर्किंग विद चिल्ड्रन’ सिस्टम में भी सुधार की तैयारी
देश में बच्चों की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार अब एक राष्ट्रीय ‘वर्किंग विद चिल्ड्रन’ चेक सिस्टम लाने की दिशा में भी काम कर रही है। अभी यह प्रणाली अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में अलग-अलग नियमों के तहत चलती है। अटॉर्नी जनरल मिशेल रोलैंड ने कहा कि सरकार इस दिशा में तेज़ी से कदम उठा रही है।

“यह हैरानी की बात है कि यह सिफारिश साल 2015 में रॉयल कमीशन की रिपोर्ट में दी गई थी, लेकिन अब तक इस पर अमल नहीं हो पाया। अब वक्त आ गया है कि कार्रवाई की जाए,” उन्होंने कहा।