कैनबरा।
लेबर सरकार द्वारा प्रस्तावित घृणा भाषण और आग्नेयास्त्रों से जुड़े कड़े क़ानून संसद से पारित होने के करीब हैं। सरकार को उम्मीद है कि विपक्षी गठबंधन (कोएलिशन) के समर्थन से यह विधेयक ऊपरी सदन में भी पारित हो जाएगा। हालांकि, इस मुद्दे पर विपक्ष के भीतर ही मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
नेशनल्स पार्टी के वरिष्ठ सांसद मैट कैनावन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोएलिशन लेबर सरकार के प्रस्तावित घृणा-विरोधी क़ानूनों का समर्थन करता है, तो वह पार्टी लाइन तोड़ते हुए इसके ख़िलाफ़ मतदान करेंगे।
यह विधेयक बॉन्डी में हुए आतंकी हमले के बाद तैयार किया गया है। इसके तहत यहूदी-विरोधी गतिविधियों पर सख़्ती, नफ़रत फैलाने वाले संगठनों को अपराध की श्रेणी में लाना और गृह मामलों के मंत्री को अधिक अधिकार देने का प्रावधान है।
लेबर सरकार और कोएलिशन के बीच इस विधेयक को लेकर सहमति बनने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे इसके संसद से पारित होने की संभावना बढ़ गई है।
लेकिन एबीसी से बातचीत में सांसद मैट कैनावन ने कहा कि मौजूदा स्वरूप में यह क़ानून अत्यधिक शक्तियाँ देता है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को नुकसान पहुँचाता है।
उन्होंने कहा,
“पूरे संगठनों पर प्रतिबंध लगाने और उन्हें अवैध घोषित करने की शक्तियाँ बहुत व्यापक हैं। इससे मंत्री को ऐसे समूहों पर भी कार्रवाई का अधिकार मिल जाएगा, जिनका हिंसा से सीधा संबंध नहीं है।”
कैनावन ने यह भी चेतावनी दी कि यह विधेयक संवैधानिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उनके अनुसार, ऑस्ट्रेलिया की उच्चतम अदालत पहले ही राजनीतिक अभिव्यक्ति के अधिकार को लोकतंत्र का अहम स्तंभ मान चुकी है।
उन्होंने कहा,
“हम एक प्रतिनिधि लोकतंत्र हैं। नागरिकों को राजनीतिक विचार व्यक्त करने का अधिकार है। यदि इस अधिकार को सीमित किया जाता है, तो यह देखना ज़रूरी है कि क्या यह प्रतिबंध वास्तव में आवश्यक और संतुलित है या नहीं।”
इस मुद्दे पर संसद में बहस तेज़ होने के आसार हैं और आने वाले दिनों में यह साफ़ होगा कि क्या यह विधेयक सर्वसम्मति से पारित होता है या विपक्ष की अंदरूनी दरारें और गहरी होती हैं।