सिडनी, 7 अगस्त 2025 – विशेष रिपोर्ट
जब सिडनी की रहने वाली 8 साल की सोफिया की मौत हुई, तब उसके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान थी — मगर उस मुस्कान के पीछे छुपा था महीनों का दर्द, सैकड़ों सुइयों की चुभन और अस्पताल की चारदीवारी में बीता बचपन।
सोफिया की मां एलिक्स कहती हैं, "डॉक्टरों ने हमें पहले कभी नहीं बताया कि वो मरने वाली है। वे बार-बार इलाज की बातें करते रहे — जबकि हमें उसकी तकलीफ को कम करना था, उसका जीवन बचाना नहीं।"
सोफिया को 2018 में दुर्लभ कैंसर एंजियोसारकोमा हुआ — जो आमतौर पर वयस्कों में पाया जाता है। बीमारी सामने आने के बाद भी उसे समय रहते विशेष पेडियाट्रिक पैलिएटिव केयर (बाल देखभाल सहायक सेवा) नहीं मिली।
ऑस्ट्रेलिया में हर साल 650 से ज्यादा बच्चे ऐसे ही दम तोड़ देते हैं। और इन बच्चों में से आधे से भी कम को मौत से पहले इंसानी गरिमा और सहूलियत भरी देखभाल मिल पाती है।
सोफिया का परिवार तब तक कीमोथेरेपी और रेडिएशन के कठोर दौर से गुजर चुका था। डॉक्टरों ने कभी स्पष्ट रूप से नहीं कहा कि अब इलाज का कोई फायदा नहीं, मगर जब मां एलिक्स ने कहा, “क्या आप मेरी बेटी को अच्छे से मरने में मदद करेंगे?”, तभी जाकर उन्हें पैलिएटिव केयर टीम से जोड़ा गया।
“वो एक अलग इंसान थी,” एलिक्स कहती हैं, “वो चट्टानें जमा करती थी, किताबें पढ़ती थी और अपने खिलौनों से कमरा भर रखा था। उसकी मौत के पहले दिन हम सब ने एक साथ प्रार्थना की। मैंने उससे कहा – जब तुम सपना देखो, तो उस रौशनी की तरफ जाना।”
सोफिया ने 7 जून 2020 को घर पर, अपनों के बीच अंतिम सांस ली।
ऑस्ट्रेलियाई स्वास्थ्य विभाग की एक रिपोर्ट बताती है कि करीब 32,000 बच्चे देश में जीवन-सीमित बीमारियों से ग्रसित हैं। फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें समय रहते उचित देखभाल नहीं मिलती।
एडिलेड की नर्स सारा फ्लेमिंग, जो 25 वर्षों से बच्चों के लिए पैलिएटिव केयर में काम कर रही हैं, कहती हैं, “कई बार हम तब बुलाए जाते हैं जब बहुत देर हो चुकी होती है। तब माता-पिता पूछते हैं – आप पहले क्यों नहीं आए?”
2023 में Palliative Care Australia ने पहली बार Paediatric Palliative Care National Action Plan लॉन्च किया, जो इस क्षेत्र में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस योजना के तहत:
नए नैदानिक दिशानिर्देश बनाए गए हैं,
स्वास्थ्यकर्मियों को संवाद कौशल सिखाने के लिए कोर्स शुरू किया गया है,
दूरदराज़ के इलाकों और समाज के वंचित तबकों के लिए विशेष योजनाएं बनाई जा रही हैं।
परियोजना प्रबंधक अनेट विकरी कहती हैं, “हमें इस सोच को बदलना होगा कि पैलिएटिव केयर सिर्फ मौत का इंतजार है। असल में, ये जीवन के बचे हुए समय को सबसे सुंदर और सम्मानजनक बनाने की कोशिश है।”
मां एलिक्स की एक बात दिल को छू जाती है — “हर किसी को नहीं बचाया जा सकता। लेकिन क्या हम उन्हें मरने से पहले चैन से जीने नहीं दे सकते?”
सोफिया की कहानी सिर्फ एक बच्ची की नहीं, बल्कि हजारों उन मासूमों की है, जो इलाज के नाम पर बेवजह दर्द झेलते हैं — और मरते हैं बिना वो प्यार, सहूलियत और शांति पाए, जिसके वे हकदार हैं।
अब वक्त है कि सिस्टम, समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था — सभी मिलकर इस चुप्पी को तोड़ें।
क्या है पैलिएटिव केयर?
यह एक विशेष चिकित्सा सेवा है जो गंभीर या लाइलाज बीमारी से जूझ रहे मरीजों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने पर केंद्रित होती है। इसमें दर्द और अन्य तकलीफों का प्रबंधन, भावनात्मक समर्थन और परिवार के लिए मार्गदर्शन शामिल होता है।
अगर आप और जानकारी चाहते हैं:
पैलिएटिव केयर के बारे में अधिक जानकारी और संसाधन पाने के लिए Palliative Care Australia की वेबसाइट पर जाएं।