नई दिल्ली। संसद में सोमवार को प्रश्नकाल के दौरान एक अनोखा नजारा देखने को मिला। विपक्ष की नेता सुस्सान लेई ने जब ट्रेज़रर जिम चौमर्स पर जोरदार हमला बोला, तो उनके ही दल के आधे से ज्यादा सांसद ध्यान ही नहीं दे रहे थे।
रिपोर्टों के अनुसार, 22 से अधिक गठबंधन (Coalition) सांसद उस समय अपने मोबाइल फोन या लैपटॉप में व्यस्त थे, जब चौमर्स सदन में अपनी बात रख रहे थे। विपक्ष की नेता लेई पूरी ताकत से सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े कर रही थीं, लेकिन उनकी पंक्ति में बैठे कई सांसदों का ध्यान कहीं और था।
यह दृश्य न केवल विपक्षी दल की एकजुटता पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि गंभीर बहस के दौरान भी कई सांसद संसद की गरिमा को नजरअंदाज कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति लेई की नेतृत्व क्षमता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। विपक्ष सरकार पर सख्त सवाल उठाने की कोशिश तो कर रहा है, लेकिन जब उसके अपने सांसद ही रुचि न लें, तो उसका असर जनता तक कमजोर पड़ता है।
संसद के भीतर इस तरह की घटनाएँ जनता के विश्वास को भी प्रभावित करती हैं। सवाल यह है कि क्या विपक्ष अपने भीतर अनुशासन और गंभीरता ला पाएगा, या फिर ऐसी ही तस्वीरें बार-बार सामने आती रहेंगी।