लिबरल पार्टी की सोशल मीडिया हैक, महिलाओं की अश्लील तस्वीरें पोस्ट होने पर माफी मांगी गई

नई विपक्ष की नेता सुज़न ले की महिला सशक्तिकरण की अपील के कुछ ही घंटों बाद बड़ा साइबर हमला

लिबरल पार्टी की सोशल मीडिया हैक, महिलाओं की अश्लील तस्वीरें पोस्ट होने पर माफी मांगी गई

ऑस्ट्रेलिया की लिबरल पार्टी उस समय विवादों में घिर गई जब पार्टी के आधिकारिक सोशल मीडिया खातों पर महिलाओं की अश्लील तस्वीरें पोस्ट कर दी गईं। यह घटना ऐसे समय पर हुई जब पार्टी की नई नेता सुज़न ले (Sussan Ley) ने एक दिन पहले ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और पार्टी को “महिलाओं के लिए गर्व से खड़ी पार्टी” बनाने की बात कही थी।

गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान में पार्टी ने स्पष्ट किया कि यह पोस्ट एक ठेकेदार (contractor) के सोशल मीडिया अकाउंट के हैक हो जाने के कारण हुई है। बयान में कहा गया:

"रात लगभग 12 बजे पार्टी की मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम) प्रोफाइल पर अनुचित सामग्री पोस्ट की गई, जो कि हमारे ठेकेदार के अकाउंट के हैक हो जाने का नतीजा थी। सभी आपत्तिजनक पोस्ट को 10 मिनट के भीतर हटा दिया गया और इसकी सूचना तुरंत ऑस्ट्रेलियन साइबर सिक्योरिटी सेंटर और मेटा को दे दी गई। हम इस घटना से किसी को हुई असहजता के लिए माफी मांगते हैं।"

पोस्ट की गई तस्वीरों में महिलाओं की नग्नता को बढ़ावा देने वाली सामग्री और स्तन वृद्धि (breast implants) के विज्ञापन शामिल थे। यह मामला पार्टी की सार्वजनिक छवि को उस वक्त धक्का पहुंचाने वाला साबित हुआ जब सुज़न ले पार्टी को महिलाओं के अनुकूल बनाने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठा रही थीं।

अपने पहले महत्वपूर्ण भाषण में ले ने कहा:

"हमें एक ऐसी लिबरल पार्टी बनानी है जो महिलाओं के लिए गर्व से खड़ी हो और महिलाओं से बनी हो। हमें उन सीटों पर और अधिक महिलाओं को प्रत्याशी बनाना होगा जहां जीतने की संभावना हो।"

उन्होंने यह भी कहा कि वह महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए कोटा प्रणाली (quota system) को लेकर खुले विचार रखती हैं:

"मैं तरीकों को लेकर निष्पक्ष हूं, लेकिन यह होना चाहिए इसको लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हूं। मौजूदा तरीकों ने काम नहीं किया है, इसलिए मैं हर उपाय के लिए तैयार हूं।"

यह घटना न केवल पार्टी के साइबर सुरक्षा ढांचे पर सवाल खड़े करती है, बल्कि महिला सशक्तिकरण को लेकर किए गए वादों की गंभीरता पर भी दृष्टि डालती है। सोशल मीडिया पर विपक्ष और नागरिकों की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

अब देखना यह होगा कि पार्टी इस संकट से किस प्रकार उबरती है और क्या यह घटना महिला प्रतिनिधित्व के उसके दावों को कमजोर करती है या मजबूती प्रदान करती है।