महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण पर बवाल: ओबीसी नाराज़, भाजपा सरकार दबाव में

महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण पर बवाल: ओबीसी नाराज़, भाजपा सरकार दबाव में

मुंबई, 4 सितंबर 2025 — महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा समाज के आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर है। राज्य सरकार ने हाल ही में मराठा समाज को कुंभी दर्जा देकर ओबीसी श्रेणी में आरक्षण का रास्ता खोलने की कोशिश की। पर यह कदम ओबीसी समुदाय को नागवार गुज़रा है। ओबीसी संगठन अब सड़कों पर उतर आए हैं और सरकार पर "आरक्षण हड़पने" का आरोप जड़ रहे हैं।


सरकार का फैसला और मराठा समाज की उम्मीदें

राज्य मंत्रिमंडल ने एक सरकारी आदेश (GR) जारी कर मराठा समाज को "कुंभी" जाति से जोड़ते हुए ओबीसी आरक्षण का लाभ दिलाने की घोषणा की। जिन मराठाओं के पास ऐतिहासिक रिकॉर्ड में "कुंभी" उल्लेख मौजूद है, उन्हें प्रमाणपत्र देकर शिक्षा और नौकरियों में ओबीसी कोटे का लाभ दिया जाएगा।
मराठा आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कार्यकर्ता मनोज जरांगे की मांग भी यही रही कि मराठाओं को ओबीसी दर्जा मिले। इस फैसले के बाद मराठा समाज में उम्मीद जगी कि दशकों से लंबित उनकी मांग आखिरकार पूरी होगी।


ओबीसी समुदाय का गुस्सा

दूसरी ओर, ओबीसी संगठनों ने इस निर्णय को "बैकडोर एंट्री" बताया। नागपुर में राष्ट्रीय ओबीसी महासंघ ने कहा कि भले ही अभी प्रत्यक्ष नुकसान नहीं दिख रहा, लेकिन भविष्य में मराठाओं के लिए दरवाज़ा खोलने से ओबीसी युवाओं की नौकरियों और शिक्षा में हिस्सेदारी पर संकट खड़ा होगा।
नांदेड़ में प्रदर्शनकारियों ने सरकारी आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध जताया। मराठवाड़ा के अंतरवली सराटी गांव में तो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तक शुरू हो गई है।


भाजपा सरकार का डैमेज कंट्रोल

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तुरंत ओबीसी वर्ग को साधने के लिए कदम बढ़ाए। सरकार ने एक कैबिनेट उप-समिति बनाई है, जिसकी कमान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले को सौंपी गई। इसमें वरिष्ठ नेता छगन भुजबल को भी शामिल किया गया है, ताकि ओबीसी नेतृत्व को प्रतिनिधित्व दिया जा सके।
लेकिन समिति की पहली ही बैठक में खटास दिख गई। भुजबल इस बैठक से अनुपस्थित रहे, जिससे महायुति (भाजपा-शिवसेना-एनसीपी) गठबंधन में मतभेद और गहराने के संकेत मिले।


ओबीसी नेताओं में भी मतभेद

ओबीसी नेतृत्व भी बंटा नज़र आ रहा है। बबनराव तायवड़े ने कहा कि ओबीसी कोटे पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। वहीं नितिन हाके का कहना है कि मराठाओं को प्रवेश देने की प्रक्रिया बेहद आसान बना दी गई है, जो भविष्य में ओबीसी वर्ग के लिए हानिकारक साबित होगी।


फडणवीस की सफाई

डिप्टी सीएम फडणवीस ने विपक्ष और ओबीसी संगठनों की आलोचना को खारिज करते हुए कहा, "सरकार किसी भी हालत में ओबीसी के अधिकारों से समझौता नहीं करेगी। मराठा समाज को न्याय दिलाना हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन ओबीसी कोटे में सेंध नहीं लगेगी।"


राजनीतिक समीकरण पर असर

यह विवाद भाजपा के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।

  • मराठा समाज: राज्य की सबसे प्रभावशाली जातियों में से एक है, जिसकी नाराज़गी चुनावी नतीजों पर सीधा असर डाल सकती है।

  • ओबीसी समाज: अब तक भाजपा का मज़बूत वोट बैंक माना जाता रहा है। यदि उनका भरोसा डगमगाता है, तो यह भाजपा के लिए नुकसानदेह होगा।

  • मित्र दलों की बेचैनी: एनसीपी (भुजबल गुट) और शिवसेना के भीतर भी इस मसले पर असहमति बढ़ रही है।


आगे की राह

राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि वह दोनों वर्गों को साथ लेकर चलेगी। उप-समिति अगले हफ्तों में ओबीसी संगठनों और मराठा प्रतिनिधियों से चर्चा करेगी। पर ज़मीनी हालात बता रहे हैं कि टकराव जल्द थमने वाला नहीं है।
यदि ओबीसी और मराठा दोनों संतुष्ट नहीं हुए, तो यह मुद्दा न केवल सामाजिक तनाव बढ़ाएगा बल्कि विधानसभा चुनाव की राजनीति में भी बड़ा फैक्टर साबित होगा।