नई दिल्ली। मोदी सरकार ने ऑनलाइन मनी गेमिंग और सट्टेबाजी को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर ली है। केंद्र सरकार संसद में "रेग्युलेशन एंड प्रमोशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट" नामक नया विधेयक पेश करने जा रही है, जिसके तहत ऐसे खेलों पर कड़ी रोक लगाने का प्रावधान होगा जिनमें पैसों का लेन-देन होता है।
बीते कुछ वर्षों में ऑनलाइन गेमिंग इंडस्ट्री तेज़ी से बढ़ी है। लाखों युवा रोज़ाना मोबाइल और कंप्यूटर पर कैश-बेस्ड गेम्स खेलते हैं। सरकार का मानना है कि इस तरह के खेल न केवल नशे और लत को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि आर्थिक धोखाधड़ी और परिवारों में आर्थिक संकट का कारण भी बन रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक नए कानून में—
पैसों से जुड़े सट्टेबाजी गेम्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा।
केवल स्किल-आधारित गेम्स को अनुमति दी जाएगी, वह भी सख्त शर्तों और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया के बाद।
अवैध गेमिंग कंपनियों पर भारी जुर्माना और जेल की सज़ा का प्रावधान होगा।
बच्चों और युवाओं को डिजिटल सुरक्षा देने के लिए अलग निगरानी तंत्र बनाया जाएगा।
जहां एक ओर सरकार इसे सामाजिक सुरक्षा और युवाओं के भविष्य की दिशा में अहम कदम बता रही है, वहीं इंडस्ट्री से जुड़े कई विशेषज्ञों का कहना है कि इससे भारत की गेमिंग इंडस्ट्री और स्टार्टअप्स पर असर पड़ सकता है। उनका तर्क है कि सही नियमन और टैक्स व्यवस्था से इसे सुरक्षित और लाभदायक बनाया जा सकता है।
बिल संसद में पेश होने के बाद चर्चा और बहस के लिए जाएगा। यदि पास होता है तो आने वाले महीनों में ऑनलाइन गेमिंग कंपनियों को अपने बिज़नेस मॉडल में बड़े बदलाव करने पड़ सकते हैं।