सिडनी/कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय दिव्यांग बीमा योजना (NDIS) को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालिया आंकड़ों और डेटा विश्लेषण से सामने आया है कि कुछ उपनगरों में NDIS सेवा प्रदाताओं की संख्या स्थानीय कैफ़े से भी अधिक हो चुकी है। सरकार अब इस योजना में हो रही अरबों डॉलर की संभावित धोखाधड़ी को लेकर दबाव में है।
NDIS की आधिकारिक वेबसाइट पर इस समय लगभग 48,000 सक्रिय सेवा प्रदाता दर्ज हैं। सोशल मीडिया और स्वतंत्र डेटा विश्लेषकों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, सिडनी के पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में प्रदाताओं की असामान्य सघनता देखी जा रही है।
उदाहरण के तौर पर, लकेम्बा (पश्चिमी सिडनी) क्षेत्र में पाँच किलोमीटर के दायरे में 1,300 से अधिक NDIS प्रदाता सूचीबद्ध हैं — यानी लगभग हर 13 निवासियों पर एक प्रदाता। इसी तरह कैसुला इलाके में 1,600 से अधिक प्रदाता दर्ज किए गए हैं।
हालाँकि इनमें से कई व्यवसाय वैध और ज़रूरी सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं, लेकिन कुछ मामलों में बेहद संदिग्ध जानकारियाँ भी सामने आई हैं। कुछ प्रदाताओं ने वेबसाइट पर सामान्य ई-मेल जैसे “email@email.com” और डमी फोन नंबर दर्ज किए हुए पाए गए हैं, जिससे सिस्टम की निगरानी क्षमता पर सवाल उठे हैं।
एक स्वतंत्र डेवलपर द्वारा तैयार किया गया इंटरैक्टिव मैप, जिसमें जनगणना के आंकड़ों को NDIS प्रदाताओं से जोड़ा गया है, उन पोस्टकोड क्षेत्रों को चिन्हित करता है जहाँ “NDIS प्रदाता कैफ़े से अधिक” हैं। इस विश्लेषण का उद्देश्य धोखाधड़ी साबित करना नहीं, बल्कि संभावित असंतुलन और अक्षमताओं की ओर ध्यान दिलाना है।
एक अन्य डेटा प्रोजेक्ट में NDIS के आवास खर्च की तुलना स्थानीय किराया बाज़ार से की गई। इसमें पाया गया कि एडिलेड जैसे शहरों में कम किराए वाले इलाकों में भी NDIS के तहत अत्यधिक भुगतान किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह पैटर्न तथाकथित “SIL फार्म” मॉडल से जुड़ा हो सकता है, जहाँ कम लागत वाले आवासों में कई प्रतिभागियों को रखकर अधिकतम सरकारी भुगतान का दावा किया जाता है। हालांकि इसे सीधी धोखाधड़ी नहीं कहा जा सकता, लेकिन यह बाज़ार की गंभीर अक्षमता का संकेत ज़रूर है।
वोलोंगोंग विश्वविद्यालय की वरिष्ठ लेखा विशेषज्ञ डॉ. मोना निकीदहाघानी का कहना है कि केवल प्रदाताओं की अधिक संख्या को सीधे धोखाधड़ी से जोड़ना सही नहीं होगा।
उनके अनुसार, “यह कुछ क्षेत्रों में ज़्यादा मांग का संकेत भी हो सकता है। धोखाधड़ी केवल स्थान से नहीं, बल्कि व्यक्तियों और सिस्टम की कमजोरियों से जुड़ी होती है।”
हालाँकि वे मानती हैं कि सरकार द्वारा हाल के महीनों में उठाए गए कदम प्रभावी रहे हैं। दिसंबर तक के छह महीनों में 34,000 से अधिक उच्च-जोखिम दावों की जांच हुई, जिनमें से 66 प्रतिशत दावे खारिज कर दिए गए।
NDIS की अनुमानित लागत 2026 तक 52 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक पहुँचने वाली है। बीते वर्षों में इस योजना में संगठित अपराध, फर्जी दावे, सेवाएँ न देने के बावजूद भुगतान और हितों के टकराव जैसे कई मामले सामने आए हैं।
सरकारी अधिकारियों ने संसद की समिति के सामने स्वीकार किया है कि धोखाधड़ी का पैमाना इतना बड़ा है कि यदि हर मामले पर मुकदमा चलाया जाए, तो न्याय व्यवस्था पर असहनीय बोझ पड़ जाएगा। अनुमान है कि लगभग 5 प्रतिशत फंड गलत तरीके से खर्च हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जांच और सज़ा से समस्या हल नहीं होगी। ज़रूरत है सिस्टम डिज़ाइन में सुधार, पारदर्शिता बढ़ाने और NDIS प्रतिभागियों को सुरक्षित रूप से शिकायत दर्ज कराने की सुविधा देने की।
NDIS का उद्देश्य दिव्यांग नागरिकों को सम्मान, स्वतंत्रता और सहायता देना है। लेकिन यदि सिस्टम की खामियों पर समय रहते काबू नहीं पाया गया, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान उन्हीं लोगों को होगा जिनके लिए यह योजना बनाई गई थी।