सिडनी, 24 फरवरी 2026।
न्यू साउथ वेल्स (NSW) की पर्यावरण मंत्री पेनी शार्प ने स्वीकार किया है कि राज्य में तेजी से बढ़ रहे एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित डेटा सेंटरों के कारण बिजली की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। उन्होंने बजट अनुमान (Budget Estimates) की सुनवाई के दौरान कहा कि उन्हें इस बात की चिंता है कि बढ़ती ऊर्जा मांग से थोक बिजली दरें प्रभावित हो सकती हैं।
राज्य में पहले से ही करीब 90 डेटा सेंटर संचालित हो रहे हैं। वहीं, सरकार की इन्वेस्टमेंट डिलीवरी अथॉरिटी (IDA) लगभग 100 अरब डॉलर (करीब 100 बिलियन डॉलर) के नए डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स के प्रस्तावों पर विचार कर रही है। यदि ये परियोजनाएं मंजूरी पाती हैं, तो ऊर्जा क्षेत्र पर अतिरिक्त 12 प्रतिशत तक मांग बढ़ने का अनुमान है।
सुनवाई के दौरान लिबरल एमएलसी जैकी मुनरो के सवालों का जवाब देते हुए मंत्री शार्प ने कहा,
“मैं हर दिन इस बात को लेकर चिंतित रहती हूं कि ऊर्जा की कीमतों का असर घरों और व्यवसायों पर कैसे पड़ता है। डेटा सेंटरों की बढ़ती मांग निश्चित रूप से बिजली की कीमतों पर दबाव डाल सकती है।”
उन्होंने माना कि थोक बिजली कीमतें मांग और आपूर्ति पर निर्भर करती हैं, और मांग में किसी भी प्रकार की वृद्धि का असर सीधे बाजार दरों पर पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार इस संभावित दबाव को कम करने के लिए विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है।
मंत्री के अनुसार, सरकार यह जांच रही है कि नए डेटा सेंटरों को बिजली ग्रिड से किस प्रकार जोड़ा जाए और ऊर्जा मिश्रण (एनर्जी मिक्स) में नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी कैसे बढ़ाई जाए, ताकि कीमतों पर प्रभाव को नियंत्रित किया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई तकनीक और क्लाउड सेवाओं की बढ़ती मांग के चलते डेटा सेंटरों का विस्तार तेज होगा। ऐसे में ऊर्जा आपूर्ति, पर्यावरणीय प्रभाव और उपभोक्ता हितों के बीच संतुलन बनाना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि वह उद्योग के साथ मिलकर ऐसी नीति तैयार करेगी जिससे निवेश और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिले, लेकिन आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।