न्यू साउथ वेल्स में हर साल 10 नए रेड-लाइट स्पीड कैमरे लगाए जाएंगे, सरकार ने फैसले का किया बचाव

न्यू साउथ वेल्स में हर साल 10 नए रेड-लाइट स्पीड कैमरे लगाए जाएंगे, सरकार ने फैसले का किया बचाव

सिडनी:
ऑस्ट्रेलिया के न्यू साउथ वेल्स (NSW) में सड़क हादसों और मौतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार आने वाले वर्षों में हर साल 10 नए रेड-लाइट स्पीड कैमरे लगाने की योजना पर काम कर रही है। हालांकि, इस फैसले को लेकर कुछ वाहन चालकों ने इसे “राजस्व बढ़ाने का तरीका” बताते हुए आलोचना की है, लेकिन सरकार ने इसे सड़क सुरक्षा के लिए ज़रूरी बताया है।

ट्रांसपोर्ट फॉर न्यू साउथ वेल्स (TfNSW) ने स्पष्ट किया है कि ये कैमरे केवल नियम तोड़ने वाले चालकों को निशाना बनाएंगे। विभाग के अनुसार, कैमरे उन चौराहों और सड़कों पर लगाए जाएंगे जहाँ दुर्घटनाओं और ‘नियर-मिस’ घटनाओं का जोखिम सबसे अधिक है।

कैमरे किन इलाकों में लगाए जाएंगे

सरकारी जानकारी के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में जिन स्थानों को प्राथमिकता दी गई है, उनमें शामिल हैं—
ऑबर्न, बीक्रॉफ्ट, ब्लैकटाउन, कॉनकॉर्ड, ग्रीनएकर, लेविशम, सिल्वेनिया की पोर्ट हैकिंग रोड, वेंटवर्थविल और वेदरिल पार्क।

ग्रामीण और क्षेत्रीय इलाकों में कैमरे इन स्थानों पर लगाए जाएंगे—
ब्लैकबट, डोयल्सन, नाउरा और सैन रेमो।

“यह जीवन बचाने की योजना है, न कि जुर्माना वसूलने की”

ट्रांसपोर्ट सेफ्टी के कार्यकारी निदेशक चादी चालहूब ने आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह कदम पूरी तरह न्यायसंगत है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष NSW की सड़कों पर 350 से अधिक लोगों की मौत हुई, जिनमें से लगभग 40 प्रतिशत दुर्घटनाएँ तेज़ रफ्तार के कारण हुई थीं।

उन्होंने कहा,
“विशेषज्ञों का मानना है कि कैमरा आधारित निगरानी सुरक्षित ड्राइविंग बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका है। रेड-लाइट स्पीड कैमरे उन चौराहों पर लगाए जाते हैं जहाँ हादसों का खतरा सबसे ज़्यादा होता है, ताकि चालक रफ्तार कम करें और लाल बत्ती तोड़ने से बचें।”

राष्ट्रीय स्तर पर भी गंभीर स्थिति

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में पूरे ऑस्ट्रेलिया में 1,300 से अधिक लोगों की सड़क हादसों में जान गई। इनमें से कई मौतें ऐसी थीं जिन्हें रोका जा सकता था।

TfNSW का कहना है कि कैमरा नेटवर्क का विस्तार किसी के साथ भेदभाव नहीं करता और सभी चालकों के लिए नियम समान हैं।

सरकार का दावा है कि यह योजना सड़कों को सुरक्षित बनाने और जान बचाने की दिशा में एक अहम कदम है।