देश का कर्ज़ बढ़ा, ख़र्चे ने फिर की आमदनी को पीछे; मध्यावधि बजट से पहले चुनौतियाँ बढ़ीं

देश का कर्ज़ बढ़ा, ख़र्चे ने फिर की आमदनी को पीछे; मध्यावधि बजट से पहले चुनौतियाँ बढ़ीं

देश की आर्थिक सेहत को लेकर चिंता एक बार फिर गहरा गई है। सरकार के स्वतंत्र राजकोषीय मूल्यांकक ने ताज़ा रिपोर्ट में राष्ट्रीय वित्तीय स्थिति को उम्मीद से अधिक कमजोर बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी ख़र्च लगातार राजस्व से अधिक होने के कारण देश का कुल कर्ज़ तेज़ी से बढ़ रहा है।

वित्त मंत्री जिम चाल्मर्स इस महीने पेश किए जाने वाले मध्यावधि बजट अपडेट से पहले संभावित बचत और व्यय में कटौती के विकल्प तलाशने में जुटे हैं। लेकिन नई रिपोर्ट ने सरकार की चिंताओं में इज़ाफ़ा कर दिया है, क्योंकि इसमें स्पष्ट संकेत दिया गया है कि मौजूदा आर्थिक वर्ष में घाटा अनुमान से अधिक रह सकता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि सामाजिक योजनाओं, स्वास्थ्य, रक्षा और अन्य कल्याणकारी कार्यक्रमों पर बढ़ते व्यय के चलते सरकारी खज़ाने पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है। इसके मुकाबले कर व अन्य स्रोतों से होने वाली आय उस गति से नहीं बढ़ रही है, जिसकी उम्मीद की गई थी।

सरकार अब दोहरी चुनौती का सामना कर रही है—एक तरफ़ आवश्यक सेवाओं पर खर्च बनाए रखना, और दूसरी ओर बढ़ते कर्ज़ को नियंत्रित करना। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि व्यय और राजस्व के बीच यह अंतर यूँ ही बढ़ता रहा, तो आने वाले वर्षों में राजकोषीय दबाव और बढ़ सकता है।

वित्त मंत्रालय ने संकेत दिया है कि बजट समीक्षा में कुछ योजनाओं में समायोजन, कर सुधारों पर विचार तथा गैर-ज़रूरी परियोजनाओं पर रोक जैसे कदम संभव हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय मध्यावधि बजट के दौरान ही सामने आएगा।