मेलबर्न / कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया में प्रस्तावित सख़्त नफ़रत विरोधी क़ानूनों के लागू होने से पहले देश के सबसे चर्चित श्वेत वर्चस्ववादी संगठन नेशनल सोशलिस्ट नेटवर्क (NSN) ने खुद को भंग करने की घोषणा कर दी है। संगठन के पूर्व नेता और कुख्यात नव-नाज़ी थॉमस सेवेल ने इसे “खेल का अंत” बताते हुए अपने समर्थकों से नए सामाजिक संबंध बनाने और पूर्व सदस्यों से दूरी बनाए रखने की अपील की है, ताकि जेल जाने से बचा जा सके।
एनएसएन ने अपने टेलीग्राम चैनल पर जारी बयान में कहा कि रविवार रात 11:59 बजे तक संगठन को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। इसके साथ ही उससे जुड़े अन्य संगठनों— व्हाइट ऑस्ट्रेलिया, यूरोपियन ऑस्ट्रेलियन मूवमेंट और व्हाइट ऑस्ट्रेलिया पार्टी— को भी बंद किया जा रहा है।
यह कदम प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ की लेबर सरकार द्वारा घोषित नए क़ानूनों के बाद उठाया गया है। सरकार ने हाल ही में संसद का विशेष सत्र बुलाकर चरमपंथी और नफ़रत फैलाने वाले संगठनों पर प्रतिबंध, नस्लीय घृणा के खिलाफ कड़े प्रावधान और राष्ट्रीय हथियार वापस ख़रीद योजना (गन बायबैक) लागू करने का प्रस्ताव रखा है। यह फैसला दिसंबर में बॉन्डी क्षेत्र में हुए आतंकी हमले के बाद लिया गया है।
अमेरिका के एक श्वेत राष्ट्रवादी ऑनलाइन चैनल को दिए गए इंटरव्यू में सेवेल ने कहा कि एनएसएन अब राज्य के साथ “खेल” जारी नहीं रख सकता।
उन्होंने दावा किया, “हम जानते थे कि यह दिन आएगा। हमारे लिए यह अध्याय समाप्त हो रहा है, लेकिन पूरी कहानी नहीं। यह एक विराम है, अंत नहीं।”
सेवेल ने अपने समर्थकों को चेतावनी दी कि नए क़ानूनों के तहत यदि दो या अधिक पूर्व सदस्य एक साथ पाए गए, तो उन्हें अवैध संगठन से जुड़े होने के आरोप में जेल भेजा जा सकता है। इसलिए उन्होंने “नए दोस्त बनाने” और पुराने नेटवर्क से दूरी बनाने की सलाह दी।
2020 में गठित एनएसएन ने हाल के वर्षों में कई उकसावे वाली गतिविधियाँ की थीं। पिछले वर्ष मेलबर्न के केंद्रीय व्यापारिक क्षेत्र में लगभग 150 काले कपड़ों में सजे सदस्यों का मार्च, जिसमें “व्हाइट मैन फाइट बैक” जैसे नारे लगाए गए, खासा विवादास्पद रहा था। इसके बाद यहूदी समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी।
संगठन से जुड़े कई सदस्य हिंसक झड़पों और नफ़रत फैलाने वाले भाषणों के आरोपों में पहले ही अदालतों का सामना कर रहे हैं। एक वरिष्ठ सदस्य फिलहाल जेल में बंद है और उसने अदालत में खुद को संगठन से अलग करने का दावा किया है।
हालांकि विपक्षी गठबंधन के कुछ सांसदों ने नए नस्लीय घृणा क़ानूनों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए ख़तरा बताया है, फिर भी चरमपंथी संगठनों पर प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर व्यापक सहमति बनती दिख रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि संगठन का औपचारिक रूप से भंग होना एक बड़ा प्रतीकात्मक कदम है, लेकिन इससे जुड़े विचार और नेटवर्क पूरी तरह समाप्त होंगे या नहीं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।