सिडनी।
ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर की सड़कों पर रविवार को देशभक्ति के नाम पर आयोजित ‘मार्च फॉर ऑस्ट्रेलिया’ रैली में दस हज़ार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागी हाथों में ऑस्ट्रेलियाई झंडे लिए नारे लगाते हुए आगे बढ़े। हालांकि, इस बड़े प्रदर्शन की शांति और गरिमा उस समय सवालों के घेरे में आ गई जब पुलिस ने पुष्टि की कि इस भीड़ में नीओ-नाज़ी (Neo-Nazi) विचारधारा से जुड़े लोग भी शामिल थे।
न्यू साउथ वेल्स पुलिस प्रवक्ता ने कहा कि रैली के दौरान सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी और किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए सैकड़ों सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे। उन्होंने बताया कि “हालांकि ज़्यादातर लोग शांतिपूर्ण ढंग से शामिल हुए, लेकिन यह तथ्य चिंताजनक है कि इस भीड़ में नीओ-नाज़ी गुट भी मौजूद रहे।”
रैली के आयोजकों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल राष्ट्रीय एकता और देशभक्ति को बढ़ावा देना था। उनके मुताबिक़, इस मार्च का मक़सद आम नागरिकों को यह संदेश देना था कि ऑस्ट्रेलिया की पहचान, संस्कृति और झंडा हर किसी के लिए गर्व का विषय है। आयोजकों ने किसी भी चरमपंथी गुट की भागीदारी से अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि उनकी नीयत को गलत ढंग से पेश किया जा रहा है।
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं ने इस रैली की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह प्रदर्शन दक्षिणपंथी चरमपंथियों के लिए मंच साबित हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि “देशभक्ति के नाम पर कट्टरपंथी संगठनों को भीड़ में जगह मिलना लोकतंत्र और सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक संकेत है।”
हाल के वर्षों में ऑस्ट्रेलिया में अतिवादी विचारधारा और संगठनों की गतिविधियों में वृद्धि दर्ज की गई है। नीओ-नाज़ी समर्थकों की उपस्थिति यह दिखाती है कि ये गुट धीरे-धीरे मुख्यधारा के आयोजनों में घुसपैठ करने लगे हैं। सुरक्षा एजेंसियां लगातार इस पर नज़र रख रही हैं, लेकिन सामाजिक संगठनों का मानना है कि केवल पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि समाज को भी एकजुट होकर ऐसे विचारों का विरोध करना होगा।