नेटफ्लिक्स ने अपनी नई डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ Fit For TV: The Reality Of The Biggest Loser के ज़रिए 2000 के दशक के सबसे लोकप्रिय रियलिटी शो द बिगेस्ट लूज़र की परतें खोल दी हैं। तीन एपिसोड की यह सीरीज़ स्काई बोर्गमैन द्वारा निर्देशित है और इसमें शो की चमक-दमक के पीछे छिपी खौफ़नाक हकीकत दिखाई गई है।
2004 से 2016 तक चला यह शो मोटापे से जूझ रहे प्रतियोगियों को कड़े व्यायाम और डाइट के जरिए तेज़ी से वजन घटाने के लिए जाना जाता था। पहले सीज़न में जहाँ केवल 500 लोग ऑडिशन देने पहुँचे थे, वहीं बाद के सीज़न में हज़ारों की भीड़ उमड़ने लगी। दर्शकों को यह शो प्रेरणादायक लगता था, लेकिन इसके पीछे प्रतियोगियों को शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ने वाली हकीकत छिपी थी।
डॉक्यूमेंट्री में कई पूर्व प्रतियोगियों ने अपनी कहानी साझा की है। सीज़न 1 के विजेता रयान बेंसन ने बताया कि फाइनल जीतने के बाद उन्हें खून की पेशाब की समस्या हुई। वहीं सीज़न 8 की ट्रेसी युकिच ने कहा कि शो की शुरुआत में केवल एक मील दौड़ने की चुनौती में उनकी जान तक चली गई थी। कई प्रतियोगियों ने यह भी स्वीकार किया कि जीतने के लिए वे खुद को भूखा रखते और हद से ज्यादा कसरत करते।
शो के निर्माताओं डेविड ब्रूम और जे.डी. रोथ पर आरोप है कि उन्होंने टीआरपी और नाटक को प्राथमिकता दी, जबकि प्रतिभागियों की सेहत को नज़रअंदाज़ किया। ट्रेनर बॉब हार्पर ने डॉक्यूमेंट्री में हिस्सा लिया लेकिन उन्होंने शो की खामियों को स्वीकार करने से इनकार किया। वहीं प्रसिद्ध ट्रेनर जिलियन माइकल्स ने इसमें भाग नहीं लिया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शो को "डाइट कल्चर" और "फैट-शेमिंग" को बढ़ावा देने वाला बताया। मेनटेनेंस फेज़ पॉडकास्ट की ऑब्री गॉर्डन का कहना है कि प्रतियोगियों को "टेम्प्टेशन" चुनौतियों में जंक फूड खिलाना, मज़ाक से ज़्यादा क्रूरता थी।
इस सीरीज़ में दिखाया गया है कि द बिगेस्ट लूज़र ने लाखों दर्शकों को आकर्षित किया, लेकिन प्रतियोगियों के लिए यह एक खतरनाक सफर साबित हुआ। कुछ का कहना है कि शो ने उनकी जान बचाई, जबकि कई आज भी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।