ईरान को बायपास कर UAE-ओमान बना सकते हैं नया समुद्री रास्ता, बदल सकता है वैश्विक तेल व्यापार का समीकरण

ईरान को बायपास कर UAE-ओमान बना सकते हैं नया समुद्री रास्ता, बदल सकता है वैश्विक तेल व्यापार का समीकरण

मध्य-पूर्व में ऊर्जा व्यापार से जुड़ा एक बड़ा भू-राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और ओमान मिलकर ऐसा नया समुद्री या वैकल्पिक मार्ग विकसित करने की योजना पर चर्चा कर रहे हैं, जो दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास कर सके। यदि यह योजना सफल होती है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय रणनीति पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

दरअसल, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला बेहद महत्वपूर्ण जलमार्ग है। इसकी चौड़ाई कई जगहों पर बहुत कम है और वास्तविक नौवहन मार्ग लगभग 10 से 11 किलोमीटर तक ही सीमित रहता है। दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का तनाव या अवरोध वैश्विक तेल बाजार को सीधे प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और पश्चिमी देशों के बीच समय-समय पर बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। कई बार ईरान की ओर से इस जलमार्ग को बंद करने की चेतावनी भी दी जाती रही है। इसी जोखिम को कम करने के लिए खाड़ी के कुछ देश वैकल्पिक रास्तों की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

इसी संदर्भ में संयुक्त अरब अमीरात और ओमान के बीच ऐसे प्रोजेक्ट पर चर्चा हो रही है, जिसके तहत तेल और गैस के निर्यात के लिए नया समुद्री मार्ग या बुनियादी ढांचा तैयार किया जा सके। इस योजना का उद्देश्य यह होगा कि तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निर्भर न रहना पड़े और ऊर्जा आपूर्ति ज्यादा सुरक्षित हो सके।

हालांकि अभी यह योजना शुरुआती स्तर पर बताई जा रही है और इसके तकनीकी व आर्थिक पहलुओं पर अध्ययन जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसा कोई नया मार्ग बनता है, तो इससे न केवल खाड़ी देशों की रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी बड़ा बदलाव आ सकता है।

फिलहाल दुनिया की नजर इस क्षेत्र पर टिकी हुई है, क्योंकि मध्य-पूर्व में ऊर्जा मार्गों से जुड़ा हर फैसला अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित करता है।