सिडनी:
सरकार द्वारा सार्वजनिक परिवहन के लिए ओपल टिकटिंग सिस्टम को आधुनिक बनाने की योजना पर अतिरिक्त 171 मिलियन डॉलर (करीब 1140 करोड़ रुपये) खर्च होने का खतरा मंडरा रहा है। पहले इस परियोजना की लागत 538 मिलियन डॉलर (करीब 3580 करोड़ रुपये) तय की गई थी, लेकिन अब यह आंकड़ा 709 मिलियन डॉलर (लगभग 4720 करोड़ रुपये) तक पहुंच सकता है।
ओपल कार्ड प्रणाली, जो बस, ट्रेन, फेरी और लाइट रेल जैसी सेवाओं में उपयोग होती है, अब पुरानी हो चली है और इसमें तकनीकी खामियां भी देखी जा रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए न्यू साउथ वेल्स सरकार ने एक नया टिकटिंग सिस्टम लागू करने की योजना बनाई थी, जिसमें मोबाइल और बैंक कार्ड से सीधे भुगतान करने की सुविधा होनी थी।
परंतु, हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार इस प्रोजेक्ट में देरी और तकनीकी दिक्कतों के चलते इसकी लागत में 171 मिलियन डॉलर का इज़ाफा हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि गलत प्रबंधन और तकनीकी बदलावों के सही समय पर लागू न हो पाने की वजह से यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
राज्य सरकार पर पहले से ही बढ़ते खर्चों और ट्रांसपोर्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर में निवेश को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि यह अनुमानित अतिरिक्त राशि सही साबित होती है, तो यह परियोजना करदाताओं की जेब पर भारी पड़ सकती है।
परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे इस परियोजना को समय पर और बजट के भीतर पूरा करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, विपक्ष ने इस पूरे मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा है कि यह एक और उदाहरण है कि किस तरह से सार्वजनिक धन का दुरुपयोग किया जा रहा है।