ऑस्ट्रेलिया में रोज़गार का रास्ता बना न्यूज़ीलैंड, हज़ारों कुशल कामगारों को मिल रहा अवसर

ऑस्ट्रेलिया में रोज़गार का रास्ता बना न्यूज़ीलैंड, हज़ारों कुशल कामगारों को मिल रहा अवसर

ऑस्ट्रेलिया में बेहतर रोज़गार और जीवन की तलाश कर रहे हज़ारों कुशल कामगारों के लिए न्यूज़ीलैंड अब एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनकर उभर रहा है। नर्सिंग, शिक्षा और निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े पेशेवर पहले न्यूज़ीलैंड में नौकरी प्राप्त कर रहे हैं और बाद में विशेष द्विपक्षीय समझौतों के तहत ऑस्ट्रेलिया में काम करने का अवसर हासिल कर रहे हैं।

दरअसल, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के बीच लंबे समय से चला आ रहा ट्रांस-टैस्मन समझौता दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे के यहाँ काम करने और बसने की सुविधा देता है। इस व्यवस्था के कारण न्यूज़ीलैंड में कार्यरत कई विदेशी मूल के पेशेवर, अपेक्षाकृत कम औपचारिकताओं के साथ ऑस्ट्रेलिया के श्रम बाज़ार में प्रवेश कर पा रहे हैं। इससे वे प्रशिक्षण और मान्यता से जुड़ी कई जटिल प्रक्रियाओं से बच जाते हैं, जिनका सामना सीधे ऑस्ट्रेलिया आने वाले प्रवासियों को करना पड़ता है।

ऑस्ट्रेलिया इस समय स्वास्थ्य सेवाओं, स्कूल शिक्षा और बुनियादी ढाँचे के विकास के लिए कुशल मानव संसाधन की गंभीर कमी से जूझ रहा है। अस्पतालों में अनुभवी नर्सों की आवश्यकता बढ़ती जा रही है, वहीं स्कूलों में योग्य शिक्षकों और निर्माण क्षेत्र में प्रशिक्षित श्रमिकों की मांग लगातार बनी हुई है। ऐसे में न्यूज़ीलैंड में काम कर चुके पेशेवर ऑस्ट्रेलियाई नियोक्ताओं के लिए तुरंत उपलब्ध और भरोसेमंद विकल्प साबित हो रहे हैं।

हालाँकि इस व्यवस्था को लेकर विवाद भी सामने आ रहे हैं। कुछ नीति विशेषज्ञों का मानना है कि यह रास्ता ऑस्ट्रेलिया की आव्रजन नीति और स्थानीय प्रशिक्षण प्रणाली को कमजोर करता है, क्योंकि इससे घरेलू कार्यबल के विकास पर असर पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर उद्योग जगत और नियोक्ता संगठनों का तर्क है कि मौजूदा श्रम संकट को देखते हुए यह व्यवस्था व्यावहारिक और आवश्यक है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक ऑस्ट्रेलिया अपनी आंतरिक प्रशिक्षण क्षमता और कुशल कामगारों की आपूर्ति को संतुलित नहीं करता, तब तक न्यूज़ीलैंड उसके लिए एक वैकल्पिक श्रम स्रोत के रूप में बना रहेगा।

कुल मिलाकर, न्यूज़ीलैंड अब केवल एक पड़ोसी देश नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया में रोज़गार और स्थायी भविष्य की ओर बढ़ने वाले हज़ारों कामगारों के लिए एक रणनीतिक प्रवेश द्वार बन चुका है।