नई दिल्ली, 13 अगस्त 2025 (एजेंसी) — केंद्र सरकार फिलहाल गाय को राष्ट्रीय पशु का दर्जा देने के लिए कोई कानून लाने की योजना नहीं बना रही है। यह जानकारी केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन और डेयरी मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 246(3) के तहत पशुओं का संरक्षण राज्यों के अधिकार क्षेत्र का विषय है और इस पर कानून बनाने की शक्ति राज्य विधानमंडलों के पास है।
उन्होंने बताया कि दिसंबर 2014 से केंद्र सरकार राष्ट्रीय गोकुल मिशन लागू कर रही है, जिसका उद्देश्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा गायों के संरक्षण हेतु उठाए गए कदमों को प्रोत्साहित और समर्थन देना है।
दूध उत्पादन में गाय का योगदान 53% से अधिक
बघेल ने सदन को सूचित किया कि वर्ष 2024 में देश के कुल दूध उत्पादन में गाय के दूध का हिस्सा 53.12 प्रतिशत रहा, जबकि भैंस के दूध का योगदान 43.62 प्रतिशत था।
मिलावटी दूध पर सख्ती
एक अन्य प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि 2024-25 में मिलावटी दूध से जुड़े 8,815 मामलों में कुल 36.72 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। इस अवधि में 33,405 दूध के नमूनों की जांच की गई, जिनमें से 12,057 मामलों में शिकायत दर्ज हुई।
त्योहारों के दौरान मिलावट पर रोक के लिए विशेष निगरानी अभियान चलाए गए — सितंबर 2024 में दीपावली से पहले और फरवरी 2025 में होली से पूर्व। मंत्री ने कहा कि त्योहारों से पहले डेयरी उत्पादों की मांग बढ़ने के कारण ऐसे अभियान आवश्यक हो जाते हैं।
पिछले तीन वर्षों में मिलावटी दूध के मामलों में लगाए गए जुर्माने की राशि लगातार बढ़ी है। 2023-24 में 34.83 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया था, जबकि 2022-23 में यह आंकड़ा 24.30 करोड़ रुपये था।