कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। पॉलिन हैनसन की ‘वन नेशन’ पार्टी अब केवल दक्षिणपंथी मतदाताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि वह लेबर पार्टी के कुछ पारंपरिक समर्थकों को भी अपनी ओर आकर्षित करने लगी है। इससे देश की दो प्रमुख पार्टियों—लेबर और कोएलिशन—दोनों की चुनावी स्थिति पर असर पड़ सकता है।
हाल के राजनीतिक विश्लेषणों और सर्वेक्षणों से संकेत मिलते हैं कि कई मतदाता मुख्यधारा की पार्टियों से निराश होकर छोटे दलों की ओर रुख कर रहे हैं। महंगाई, जीवन-यापन की बढ़ती लागत और क्षेत्रीय इलाकों में विकास की कमी जैसे मुद्दों ने लोगों में असंतोष बढ़ाया है। ऐसे में ‘वन नेशन’ खुद को उन मतदाताओं की आवाज के रूप में पेश कर रही है, जो महसूस करते हैं कि उनकी समस्याओं को बड़ी पार्टियां नजरअंदाज कर रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति कुछ हद तक ब्रिटेन की राजनीति से मिलती-जुलती है, जहां निगेल फराज की ‘रिफॉर्म यूके’ पार्टी ने भी पारंपरिक दलों के खिलाफ नाराजगी का लाभ उठाकर समर्थन हासिल किया है।
ऑस्ट्रेलिया में भी राजनीतिक परिदृश्य धीरे-धीरे बदलता दिखाई दे रहा है। ‘वन नेशन’ का समर्थन बढ़ना इस बात का संकेत है कि मतदाता अब वैकल्पिक राजनीतिक विकल्प तलाश रहे हैं। हालांकि यह देखना बाकी है कि आगामी चुनावों में यह रुझान कितना प्रभाव डालता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यदि यही रुझान जारी रहा तो आने वाले समय में ऑस्ट्रेलिया की दो-दलीय राजनीति की परंपरागत संरचना को चुनौती मिल सकती है। साथ ही प्रमुख पार्टियों को भी अपनी नीतियों और जनसंपर्क रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।