वन नेशन का उभार: गठबंधन की जमीन खिसकी, 30+ सीटों पर दावेदारी

वन नेशन का उभार: गठबंधन की जमीन खिसकी, 30+ सीटों पर दावेदारी

कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया की दक्षिणपंथी पार्टी वन नेशन की लोकप्रियता में तेज़ उछाल ने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। ताज़ा जनमत सर्वेक्षणों और चुनावी विश्लेषणों के अनुसार, यदि आज चुनाव कराए जाएँ तो वन नेशन न केवल गठबंधन को भारी नुकसान पहुँचा सकती है, बल्कि संसद में आधिकारिक विपक्ष की भूमिका में भी आ सकती है।

राजनीतिक शोध संस्था डेमोसएयू के अनुसार, वन नेशन अब 30 से अधिक सीटों पर गंभीर दावेदारी की स्थिति में है। इससे पहले अक्टूबर–नवंबर में किए गए सर्वेक्षण में पार्टी को 12 सीटें मिलने का अनुमान था, लेकिन उसके बाद समर्थन में और तेज़ी आई है।

डेमोसएयू के मल्टी-लेवल रिग्रेशन मॉडल के मुताबिक, उस समय वन नेशन का प्राथमिक वोट 17 प्रतिशत था। हालिया सर्वेक्षणों में यह बढ़कर 22 से 23 प्रतिशत तक पहुँच चुका है। सोमवार को आए न्यूज़पोल में वन नेशन ने पहली बार कोएलिशन को पीछे छोड़ दिया — ऑस्ट्रेलियाई राजनीति के इतिहास में यह पहली बार हुआ है कि किसी छोटी पार्टी ने बड़ी पार्टियों में से एक को प्राथमिक वोट में मात दी हो।

विशेषज्ञों का कहना है कि दिसंबर में बॉन्डी में हुए आतंकी हमले के बाद सरकार और विपक्ष की प्रतिक्रिया से जनता में असंतोष बढ़ा, जिसका सीधा लाभ वन नेशन को मिला। इस बीच कोएलिशन के भीतर भी संकट गहराया है। नेशनल्स पार्टी द्वारा घृणा भाषण कानूनों के मुद्दे पर समर्थन वापस लेने से गठबंधन एक बार फिर टूट की कगार पर आ गया है।

डेमोसएयू के शोध प्रमुख जॉर्ज हसानाकोस के अनुसार, वन नेशन की ताकत सबसे पहले ग्रामीण और क्षेत्रीय इलाकों, खासकर क्वींसलैंड और उत्तरी न्यू साउथ वेल्स में उभरी है। उन्होंने कहा कि बढ़ते वोट प्रतिशत के साथ पार्टी अब बाहरी शहरी सीटों में भी मज़बूत चुनौती बनती जा रही है।

हालाँकि उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि लेबर पार्टी की प्राथमिकता सूची वन नेशन के लिए बड़ी बाधा बन सकती है, क्योंकि लेबर अक्सर वन नेशन के बजाय कोएलिशन को वरीयता देती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि परिस्थितियाँ अनुकूल रहीं और कोएलिशन का जनाधार और कमजोर पड़ा, तो वन नेशन न केवल क्षेत्रीय इलाकों में बल्कि बाहरी महानगरीय सीटों में भी सेंध लगा सकती है। ऐसी स्थिति में यह पार्टी संसद में तीसरी नहीं, बल्कि दूसरी सबसे बड़ी शक्ति बन सकती है।

ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में यह बदलाव पारंपरिक दो-दलीय व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है और आने वाले महीनों में इसका असर चुनावी रणनीतियों पर साफ़ दिखाई दे सकता है।