ऑनलाइन गेमिंग: मनोरंजन नहीं, बनता जा रहा मौत का जाल

ऑनलाइन गेमिंग: मनोरंजन नहीं, बनता जा रहा मौत का जाल

डिजिटल युग में मोबाइल और इंटरनेट जहाँ ज्ञान और मनोरंजन का बड़ा माध्यम बने हैं, वहीं इनका अनियंत्रित इस्तेमाल बच्चों और किशोरों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की आत्महत्या ने ऑनलाइन गेमिंग और डिजिटल लत से जुड़े खतरों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

गाजियाबाद की दर्दनाक घटना

गाजियाबाद के साहिबाबाद स्थित भारत सिटी सोसायटी में मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात तीन सगी बहनों ने नौवीं मंजिल की बालकनी से कूदकर आत्महत्या कर ली। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें लंबे समय से मोबाइल फोन पर एक ऑनलाइन ‘कोरियन लव गेम’ खेल रही थीं और कोरियन कल्चर से गहराई से प्रभावित थीं।

बताया जा रहा है कि वे न स्कूल जा रही थीं और न ही सामाजिक गतिविधियों में हिस्सा ले रही थीं। उन्होंने अपने कोरियन नाम तक रख लिए थे और अधिकांश समय मोबाइल फोन में ही व्यस्त रहती थीं। करीब 15 दिन पहले पिता द्वारा मोबाइल फोन छीनकर बेच दिए जाने के बाद तीनों मानसिक तनाव में आ गईं।

मंगलवार रात करीब पौने दो बजे तीनों ने फ्लैट की बालकनी से छलांग लगा दी। मौके से आठ पन्नों का सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें परिवार द्वारा कोरियन कल्चर और गेमिंग से दूर रखने को आत्महत्या का कारण बताया गया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और किसी अंतिम निष्कर्ष से बच रही है।

बढ़ती ऑनलाइन गेमिंग की लत

यह घटना किसी एक परिवार की त्रासदी भर नहीं है, बल्कि देशभर में फैल रही एक गंभीर समस्या की ओर इशारा करती है। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में 12 से 25 वर्ष की आयु के बच्चे, किशोर और युवा ऑनलाइन गेमिंग की लत का शिकार हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, केरल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों से ऐसे मामले सामने आ चुके हैं।

यह समस्या अब केवल शहरी इलाकों तक सीमित नहीं रही। सस्ते स्मार्टफोन और इंटरनेट डेटा की आसान उपलब्धता के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भी घंटों मोबाइल पर गेमिंग और सोशल मीडिया में समय बिता रहे हैं।

पहले भी सामने आ चुके हैं खतरनाक मामले

ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी मौतों का सबसे खौफनाक उदाहरण वर्ष 2017-18 में सामने आया ‘ब्लू व्हेल चैलेंज’ था। इस गेम में 50 दिनों तक खतरनाक टास्क दिए जाते थे, जिनका अंत आत्महत्या से होता था। देश के कई हिस्सों में किशोरों की मौत के बाद मोबाइल और सोशल मीडिया गतिविधियों में इस गेम के संकेत मिले थे।

इसके अलावा PUBG जैसे लोकप्रिय गेम भी आत्महत्या से सीधे जुड़े न होने के बावजूद, अत्यधिक लत के कारण हिंसा, अवसाद और अपराध से जुड़े मामलों में चर्चा में रहे हैं। कई घटनाओं में गेम खेलने से रोके जाने पर बच्चों द्वारा आत्महत्या या हिंसक व्यवहार की घटनाएँ सामने आ चुकी हैं।

माता-पिता और समाज के लिए चेतावनी

विशेषज्ञ मानते हैं कि बच्चों को पूरी तरह तकनीक से दूर रखना समाधान नहीं है, लेकिन उनकी डिजिटल गतिविधियों पर निगरानी बेहद जरूरी है। माता-पिता को बच्चों से संवाद बनाए रखना, उनके व्यवहार में हो रहे बदलावों पर ध्यान देना और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग की मदद लेना चाहिए।

गाजियाबाद की यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि मनोरंजन के नाम पर डिजिटल प्लेटफॉर्म कब मानसिक दबाव और मौत का कारण बन जाएँ, इसका अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो जाता है। बच्चों की सुरक्षा के लिए परिवार, समाज और सरकार—तीनों को मिलकर ठोस कदम उठाने की जरूरत है।