भुवनेश्वर।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को ओडिशा के झारसुगुड़ा ज़िले से भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) की पूरी तरह स्वदेशी विकसित 4जी प्रणाली का शुभारंभ करेंगे। यह अवसर भारत के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि इस पहल के बाद देश उन चुनिंदा राष्ट्रों—जैसे डेनमार्क, स्वीडन, दक्षिण कोरिया और चीन—की श्रेणी में आ जाएगा, जो दूरसंचार उपकरण और नेटवर्क तकनीक का उत्पादन स्वयं करते हैं।
सरकार की इस परियोजना के तहत प्रधानमंत्री मोदी 97,500 से अधिक मोबाइल 4जी टॉवरों का उद्घाटन करेंगे। इनमें से 14,180 टॉवरों को डिजिटल भारत निधि से वित्त पोषित किया गया है। इन टॉवरों का लक्ष्य देश के 26,700 असंबद्ध गांवों को नेटवर्क से जोड़ना है। ये गांव मुख्य रूप से सीमावर्ती, नक्सल प्रभावित और दुर्गम इलाकों में बसे हुए हैं।
दूरसंचार मंत्रालय के अनुसार, इन टॉवरों के माध्यम से लगभग 20 लाख नए उपभोक्ताओं को हाईस्पीड इंटरनेट सेवाओं का लाभ मिलेगा। इससे ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में संचार क्रांति का नया अध्याय शुरू होगा।
बीएसएनएल की यह 4जी प्रणाली पूरी तरह मेक इन इंडिया की भावना पर आधारित है।
इसमें तेजस नेटवर्क द्वारा विकसित रेडियो एक्सेस नेटवर्क (RAN) का उपयोग किया गया है।
सी-डॉट (C-DOT) ने इस परियोजना के लिए कोर नेटवर्क तैयार किया है।
जबकि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने इस संपूर्ण तकनीक का इंटीग्रेशन किया है।
दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि यह प्रणाली क्लाउड-आधारित और भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे आसानी से 5जी में अपग्रेड किया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि यह परियोजना केवल दूरसंचार के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह डिजिटल इंडिया मिशन को नई ऊर्जा प्रदान करेगी। ग्रामीण इलाकों में हाईस्पीड इंटरनेट से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और ई-गवर्नेंस सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान होगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के मज़बूत होने से स्टार्टअप्स, ग्रामीण उद्यमिता और ऑनलाइन सेवाओं का भी तेज़ी से विस्तार होगा।
इस पहल के साथ भारत अब दूरसंचार क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर मज़बूत क़दम बढ़ा रहा है। अभी तक 4जी और 5जी तकनीक के लिए विदेशी उपकरणों और कंपनियों पर निर्भरता थी, लेकिन अब स्वदेशी तकनीक से न केवल आर्थिक बचत होगी बल्कि रणनीतिक स्वतंत्रता भी मिलेगी।