पीएम-सूरज पोर्टल से वित्त वर्ष 2024-25 में 1.39 लाख उद्यमियों को मिला ऋण

लक्ष्य से अधिक लाभार्थियों तक पहुंची योजना, 1,389.61 करोड़ रुपये का वितरण

पीएम-सूरज पोर्टल से वित्त वर्ष 2024-25 में 1.39 लाख उद्यमियों को मिला ऋण

केंद्र सरकार द्वारा सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों के सशक्तिकरण के उद्देश्य से शुरू किए गए प्रधानमंत्री सामाजिक उत्थान एवं रोजगार आधारित जनकल्याण (पीएम-सूरज) पोर्टल ने वित्त वर्ष 2024-25 में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इस योजना के तहत देशभर में 1.39 लाख उद्यमियों को कुल 1,389.61 करोड़ रुपये का ऋण प्रदान किया गया।

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने मंगलवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस वित्त वर्ष में एक लाख लाभार्थियों को ऋण सहायता देने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते यह लक्ष्य काफी पहले ही पार कर लिया गया।

विभिन्न राष्ट्रीय निगमों के माध्यम से मिला लाभ

मंत्री ने सदन को अवगत कराया कि पीएम-सूरज पोर्टल के माध्यम से ऋण वितरण का कार्य राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम तथा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम द्वारा किया गया। इन संस्थाओं ने पोर्टल के माध्यम से पात्र लाभार्थियों को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई।

आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम

मंत्री के अनुसार, पीएम-सूरज एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसका उद्देश्य अनुसूचित जातियों, सफाई कर्मियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लोगों को बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इस पोर्टल के जरिए ऋण आवेदन प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया गया है।

उन्होंने कहा कि यह योजना न केवल स्वरोजगार को बढ़ावा दे रही है, बल्कि छोटे व्यवसायों, पारंपरिक पेशों और नए उद्यमों को मजबूती देकर रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभा रही है।

पारदर्शिता और डिजिटल पहुंच पर जोर

सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यम से ऋण वितरण से बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है और वास्तविक जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचा है। पीएम-सूरज पोर्टल के माध्यम से लाभार्थी एक ही मंच पर विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर आवेदन कर सकते हैं।

केंद्र सरकार ने संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में इस पोर्टल के दायरे का और विस्तार किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक वंचित वर्गों को आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।