‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान बंकरों में थी पाक सेना, राष्ट्रपति जरदारी का बड़ा कबूलनामा

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान बंकरों में थी पाक सेना, राष्ट्रपति जरदारी का बड़ा कबूलनामा

पाकिस्तान के राष्ट्रपति Asif Ali Zardari ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसा बयान दिया है, जिसने न सिर्फ उनके देश की सुरक्षा तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान की किरकिरी कराई है। जरदारी ने स्वीकार किया कि भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हालात इतने तनावपूर्ण थे कि पाकिस्तानी सेना को बंकरों में शरण लेनी पड़ी और उन्हें खुद भी बंकर में रहने की सलाह दी गई थी।

सार्वजनिक मंच से चौंकाने वाला बयान

इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति जरदारी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के समय पाकिस्तान में हालात बेहद संवेदनशील हो गए थे। उन्होंने माना कि संभावित सैन्य कार्रवाई के डर से सेना ने सुरक्षात्मक कदम उठाए और बंकरों में रहना पड़ा। राष्ट्रपति के इस बयान को पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों और आत्मविश्वास पर गंभीर चोट के रूप में देखा जा रहा है।

आर्थिक संकट और सैन्य दबाव

विशेषज्ञों का कहना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है, जब Pakistan गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। बढ़ती महंगाई, विदेशी कर्ज और कमजोर अर्थव्यवस्था ने देश की सैन्य क्षमता पर भी असर डाला है। ऐसे हालात में सेना का बंकरों में छिपना इस बात की ओर इशारा करता है कि पाकिस्तान अंदरूनी और बाहरी दबावों से घिरा हुआ है।

पहलगाम हमले के बाद भारत की कार्रवाई

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की मौत के बाद भारत ने कड़ा रुख अपनाया था। 6-7 मई की रात भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। इन हमलों में आतंकवादी संगठनों के मुख्यालय और प्रशिक्षण शिविरों को निशाना बनाया गया था।

पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें

जरदारी का यह कबूलनामा पाकिस्तान के उस दावे को कमजोर करता है, जिसमें वह खुद को सैन्य रूप से मजबूत बताता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राष्ट्रपति का यह बयान न केवल विपक्ष को हमलावर होने का मौका देगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भी पाकिस्तान की स्थिति को और असहज कर सकता है।

कुल मिलाकर, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में आया यह बयान पाकिस्तान के लिए एक नई कूटनीतिक और राजनीतिक चुनौती बनकर उभरा है।