आज संसद के मानसून सत्र में 'ऑपरेशन सिंदूर' और पहलगाम आतंकी हमले को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जहां सरकार से कड़े सवाल पूछे, वहीं गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सरकार की ओर से जवाबी हमले किए।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री की विदेश नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल विदेशी नेताओं से गले मिलना, फोटो खिंचवाना और प्रचार करना समाधान नहीं है। उन्होंने पूछा:
"क्या अमेरिका की मध्यस्थता से सीजफायर हुआ? अगर ऐसा है, तो क्या ये भारत की नीति 'थर्ड पार्टी मध्यस्थता से इनकार' के खिलाफ नहीं है?"
खड़गे ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा युद्धविराम के दावे पर प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाया:
"ट्रंप 29 बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने सीजफायर कराया, लेकिन मोदी जी अब तक खामोश हैं।"
खड़गे और प्रियंका गांधी ने पहलगाम हमले को इंटेलिजेंस फेल्योर करार देते हुए गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग की। प्रियंका गांधी ने कहा:
"सरकार के भरोसे लोग तीर्थ यात्रा पर गए थे, लेकिन सरकार ने उन्हें भगवान के भरोसे छोड़ दिया।"
गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में जानकारी दी:
पहलगाम हमले के तीनों पाकिस्तानी आतंकी मारे गए।
"सेना ने 7 मई को 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाया और बैसरन के गुनहगारों को ठोक दिया।"
"हमने पहले ही 22 मई से आतंकियों की ट्रैकिंग शुरू कर दी थी।"
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार की विदेश नीति पर तंज कसा:
"सरकार पाकिस्तान से खतरा बताकर चीनी चुनौती को नजरअंदाज कर रही है।"
प्रियंका गांधी ने कहा कि सरकार ने सीजफायर के पीछे की वजह नहीं बताई:
"सीजफायर किस दबाव में हुआ, यह देश को जानना चाहिए।"