सिडनी। ऑस्ट्रेलिया के सिडनी महानगर का तेजी से उभरता इलाका पर्रामट्टा अब “दूसरा शहर” कहलाने लगा है। ऊंची इमारतें, चमकदार दफ्तर और आधुनिक अपार्टमेंट—सब कुछ यहां तेजी से विकसित हो रहा है। लेकिन इसी विकास के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है: क्या पर्रामट्टा के केंद्रीय व्यापारिक क्षेत्र (CBD) में नई इमारतें दफ्तरों के लिए बननी चाहिए या किराये के मकानों के लिए?
पर्रामट्टा स्क्वायर और आसपास के इलाकों में कई सरकारी और निजी दफ्तर स्थापित किए गए हैं। न्यू साउथ वेल्स सरकार ने भी पश्चिमी सिडनी में रोजगार बढ़ाने के लिए कई विभाग यहां स्थानांतरित किए हैं। समर्थकों का कहना है कि यदि और कार्यालय बनते हैं तो—
स्थानीय स्तर पर हजारों नई नौकरियां पैदा होंगी,
पश्चिमी सिडनी के लोगों को शहर के मुख्य हिस्से तक लंबी यात्रा नहीं करनी पड़ेगी,
पर्रामट्टा एक मजबूत व्यावसायिक केंद्र के रूप में स्थापित होगा।
व्यापारिक संगठनों का तर्क है कि मजबूत ऑफिस हब बनने से कैफे, रिटेल और सेवा क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा।
दूसरी ओर, सिडनी में आवास संकट गहराता जा रहा है। किराये आसमान छू रहे हैं और खाली घरों की संख्या बेहद कम है। ऐसे में शहरी योजनाकारों और आवास समर्थक समूहों का कहना है कि—
CBD में अधिक रिहायशी अपार्टमेंट बनने चाहिए,
काम के स्थान के पास रहने से ट्रैफिक और प्रदूषण कम होगा,
शहर का केंद्र 24 घंटे जीवंत बना रहेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि महामारी के बाद वर्क-फ्रॉम-होम संस्कृति बढ़ी है, जिससे ऑफिस स्पेस की मांग पहले जितनी मजबूत नहीं रही। ऐसे में खाली या कम उपयोग वाली इमारतों को आवास में बदला जा सकता है।
राज्य सरकार, स्थानीय परिषद और निजी डेवलपर्स के बीच इस मुद्दे पर चर्चा तेज है। एक ओर आर्थिक विकास और निवेश का दबाव है, तो दूसरी ओर सामाजिक जरूरतें और आवास संकट।
शहरी विकास विशेषज्ञों का सुझाव है कि “मिक्स्ड-यूज” मॉडल—जहां एक ही परिसर में दफ्तर, दुकानें और आवास शामिल हों—सबसे संतुलित समाधान हो सकता है।
पर्रामट्टा का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि नीति-निर्माता किसे प्राथमिकता देते हैं—रोजगार सृजन या आवास उपलब्धता, या फिर दोनों के बीच संतुलन। फिलहाल यह बहस सिर्फ जमीन के इस्तेमाल की नहीं, बल्कि पश्चिमी सिडनी के सामाजिक और आर्थिक भविष्य की है।