नई दिल्ली। फॉर्मूला-1 की दुनिया में ऑस्ट्रेलिया के उभरते सितारे ऑस्कर पियास्त्री इस समय ड्राइवर्स चैंपियनशिप में 34 अंकों की बढ़त के साथ सबसे आगे हैं। डच ग्रां प्री में शानदार जीत और टीममेट लैंडो नॉरिस की इंजन खराबी के कारण रिटायरमेंट ने पियास्त्री को खिताब की दौड़ में मजबूत बना दिया है।
अब सवाल यह है कि क्या मैक्लारेन टीम दोनों ड्राइवरों को बराबरी का मौका दे पाएगी या फिर राजनीति और पक्षपात चैंपियनशिप पर असर डालेगा?
पियास्त्री के लिए सबसे बड़ा सहारा हैं उनके मैनेजर और पूर्व एफ-1 ड्राइवर मार्क वेबर। वेबर खुद तीन बार ड्राइवर्स चैंपियनशिप में तीसरे स्थान पर रहे, लेकिन उस दौर में उन्हें रेड बुल टीम में साथी सेबास्टियन वेटल के पक्ष में फैसले होने का आरोप झेलना पड़ा।
2010 ब्रिटिश ग्रां प्री जीतने के बाद उनका मशहूर बयान – “नॉट बैड फॉर अ नंबर 2 ड्राइवर” – आज भी टीम ऑर्डर्स और फेवरिटिज्म की बहस का प्रतीक है। यही कड़वा अनुभव वेबर को पियास्त्री का सबसे मजबूत रक्षक बनाता है।
पिछले सीजन मैक्लारेन पर यह आरोप लगा था कि रणनीतिक फैसलों में कभी-कभी धुंधलापन था। हंगरी में पियास्त्री को नॉरिस से आगे निकलने का मौका देकर उनकी पहली जीत दिलाई गई, लेकिन उस फैसले ने टीम के भीतर सवाल खड़े कर दिए।
इस साल टीम बॉस एंड्रिया स्टेला और सीईओ जैक ब्राउन लगातार यह दावा कर रहे हैं कि दोनों ड्राइवरों को बराबरी का मैदान दिया जाएगा। अभी तक पियास्त्री और नॉरिस के बीच मुकाबले साफ-सुथरे रहे हैं और दोनों का आपसी संबंध भी सौहार्दपूर्ण है।
सीजन में अभी नौ रेस बाकी हैं और अगला पड़ाव है इटली का मशहूर मोंज़ा सर्किट, जहां पिछले साल पियास्त्री ने नॉरिस को ओवरटेक कर सभी को चौंकाया था।
नॉरिस सात साल से मैक्लारेन के साथ हैं और स्वाभाविक रूप से टीम के भीतर उनकी गहरी पकड़ है। लेकिन अब पियास्त्री के प्रदर्शन ने हालात बदल दिए हैं। इस बार मैक्लारेन पर दबाव है कि वे रणनीति में किसी भी तरह का पक्षपात न करें।
ऑस्ट्रेलिया के युवा सितारे पियास्त्री की खिताबी जंग केवल ट्रैक पर नहीं, बल्कि टीम पॉलिटिक्स के इर्द-गिर्द भी घूमेगी। ऐसे में मार्क वेबर का अनुभव उन्हें न सिर्फ प्रेरणा देगा बल्कि यह सुनिश्चित करेगा कि इतिहास की गलतियां दोहराई न जाएं।