मस्जिदों को धमकियों पर सियासी घमासान, पीएम ने हैनसन के बयानों को बताया नफरत को बढ़ावा; आईएसआईएस दुल्हनों की वापसी पर भी विवाद

मस्जिदों को धमकियों पर सियासी घमासान, पीएम ने हैनसन के बयानों को बताया नफरत को बढ़ावा; आईएसआईएस दुल्हनों की वापसी पर भी विवाद

ऑस्ट्रेलिया की राजनीति में एक बार फिर सांप्रदायिक सद्भाव और राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा गरमा गया है। देश की मस्जिदों को मिली कथित धमकियों के बीच प्रधानमंत्री Anthony Albanese ने वन नेशन पार्टी की नेता Pauline Hanson के हालिया बयानों की कड़ी आलोचना की है। वहीं ग्रीन्स पार्टी की उपनेता Mehreen Faruqi ने विदेशों में फंसी आईएसआईएस से जुड़ी ऑस्ट्रेलियाई महिलाओं और बच्चों की वापसी की मांग दोहराई है, जबकि विपक्षी सीनेटर James Paterson ने ऐसे लोगों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात कही है।

प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने कहा कि देश में किसी भी समुदाय के खिलाफ नफरत भड़काने वाली भाषा अस्वीकार्य है। उन्होंने बिना नाम लिए कहा कि कुछ नेताओं के बयान समाज में विभाजन को गहरा करते हैं और इससे कट्टरपंथी सोच को बढ़ावा मिल सकता है। यह टिप्पणी उस समय आई जब पॉलिन हैनसन ने सार्वजनिक रूप से यह सवाल उठाया था कि क्या “अच्छे मुसलमान” होते हैं, और अपने रुख पर कायम रहीं।

ग्रीन्स की मांग: मानवीय आधार पर वापसी

ग्रीन्स की सीनेटर मेहरीन फारूकी ने कहा कि सीरिया और अन्य संघर्षग्रस्त इलाकों में रह रहीं ऑस्ट्रेलियाई महिलाओं और बच्चों को वापस लाया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि बच्चों को उनके माता-पिता के कर्मों की सजा नहीं दी जानी चाहिए और सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया और निगरानी के जरिए सुरक्षा चिंताओं का समाधान किया जा सकता है।

विपक्ष का कड़ा रुख

दूसरी ओर, लिबरल पार्टी के सीनेटर जेम्स पैटरसन ने आईएसआईएस से जुड़े किसी भी व्यक्ति की वापसी पर सख्त आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और ऐसे लोगों की वापसी से संभावित खतरा पैदा हो सकता है। पैटरसन ने स्पष्ट किया कि सरकार को “जीरो टॉलरेंस” नीति अपनानी चाहिए।

सामाजिक सद्भाव पर चिंता

विश्लेषकों का मानना है कि मस्जिदों को मिली धमकियों और नेताओं के बयानों ने देश में सामाजिक सौहार्द को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सामुदायिक नेताओं ने अपील की है कि राजनीतिक दल संवेदनशील मुद्दों पर संयमित भाषा का इस्तेमाल करें और बहुसांस्कृतिक समाज की एकता को प्राथमिकता दें।

सरकार ने दोहराया है कि किसी भी तरह की नफरत या हिंसा के लिए ऑस्ट्रेलिया में कोई जगह नहीं है और सुरक्षा एजेंसियां सभी धमकियों की गंभीरता से जांच कर रही हैं।