कैनबरा।
ऑस्ट्रेलिया में राष्ट्रीय पहचान और परंपराओं को लेकर जारी बहस के बीच एक ताज़ा जनमत सर्वेक्षण ने स्पष्ट कर दिया है कि देश की बड़ी आबादी ऑस्ट्रेलिया दिवस की मौजूदा तारीख को लेकर किसी बदलाव के पक्ष में नहीं है। सर्वे के अनुसार, 88 प्रतिशत ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों ने अपनी राष्ट्रीय पहचान पर गर्व व्यक्त किया है और देश के लिए एक निर्धारित राष्ट्रीय दिवस बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है।
पिछले कुछ वर्षों से ऑस्ट्रेलिया दिवस की तारीख को बदलने को लेकर सामाजिक संगठनों, कार्यकर्ताओं और कुछ राजनीतिक वर्गों द्वारा मांग उठाई जाती रही है। इनका तर्क है कि यह तारीख देश के मूल निवासियों की भावनाओं से जुड़ी हुई है। हालांकि, ताज़ा सर्वेक्षण से यह संकेत मिला है कि आम जनता का बड़ा वर्ग इस मुद्दे पर यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में है।
सर्वे में शामिल अधिकांश लोगों ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि देश की उपलब्धियों, लोकतांत्रिक मूल्यों और बहुसांस्कृतिक समाज का उत्सव है। उत्तरदाताओं का मानना है कि राष्ट्रीय दिवस को विभाजन का कारण बनाने के बजाय इसे एकजुटता और साझा पहचान के रूप में देखा जाना चाहिए।
विश्लेषकों के अनुसार, सर्वेक्षण के नतीजे यह दर्शाते हैं कि ऑस्ट्रेलियाई समाज में राष्ट्रीय गौरव की भावना अब भी मज़बूत है। लोग अपनी संस्कृति, संस्थाओं और देश की प्रगति पर गर्व महसूस करते हैं और परंपराओं को बनाए रखने को प्राथमिकता देते हैं। कई नागरिकों ने यह भी कहा कि देश के इतिहास पर खुली चर्चा होनी चाहिए, लेकिन इसके लिए राष्ट्रीय दिवस की तारीख बदलना आवश्यक नहीं है।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह सर्वे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि जनमत के ये आंकड़े सरकार और नीति-निर्माताओं के लिए एक स्पष्ट संदेश हैं कि राष्ट्रीय प्रतीकों और परंपराओं से जुड़े फैसलों में जनता की भावनाओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
कुल मिलाकर, यह सर्वे इस बात की पुष्टि करता है कि ऑस्ट्रेलिया दिवस को लेकर चल रही बहस के बावजूद देश की बहुसंख्यक जनता अपनी राष्ट्रीय पहचान पर गर्व करती है और मौजूदा राष्ट्रीय दिवस को बनाए रखने के पक्ष में खड़ी है।