पुदुचेरी में आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म हो चुका है। दिलचस्प बात यह है कि यहां सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों ही एक ही मुद्दे को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं—राज्य का दर्जा (स्टेटहुड)। इस केंद्रशासित प्रदेश में चुनावी बहस अब विकास, अधिकार और प्रशासनिक स्वायत्तता के इर्द-गिर्द सिमट गई है।
पुदुचेरी देश का शायद एकमात्र ऐसा क्षेत्र बन गया है जहां सत्ता और विपक्ष के बीच मुख्य मतभेदों के बावजूद प्रमुख चुनावी एजेंडा एक ही है। एक ओर एनडीए गठबंधन है, तो दूसरी ओर डीएमके-कांग्रेस गठबंधन—दोनों ही राज्य का दर्जा दिलाने का वादा कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री रंगास्वामी का कहना है कि पुदुचेरी का विकास केंद्र के साथ तालमेल बनाकर ही संभव है, और राज्य का दर्जा मिलने तक यही व्यावहारिक रास्ता है। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रदेश अध्यक्ष वैतिलिंगम का मानना है कि राज्य बनने से स्थानीय जरूरतों और नीतियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सकेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पुदुचेरी को राष्ट्रीय स्तर पर भी रणनीतिक रूप से देखा जाता है। भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए यह क्षेत्र संसद में अपनी स्थिति मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
30 विधानसभा सीटों वाले इस छोटे से केंद्रशासित प्रदेश में हर सीट पर लगभग 25 से 45 हजार मतदाता हैं। यहां की राजनीति में धर्म और जाति जैसे पारंपरिक मुद्दों की तुलना में लोकलुभावन योजनाएं और चुनावी घोषणाएं अधिक प्रभावी साबित होती हैं।
इस बार का चुनाव पुदुचेरी के लिए केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि उसकी प्रशासनिक पहचान तय करने का भी मौका माना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि राज्य का दर्जा देने का वादा किस दल को जनता का विश्वास दिला पाता है।