सिडनी।
ऑस्ट्रेलिया में लाखों गृह-ऋण धारकों की निगाहें आज Reserve Bank of Australia (RBA) के फैसले पर टिकी हैं। केंद्रीय बैंक आज यह तय करेगा कि ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए या उन्हें फिलहाल स्थिर रखा जाए।
यदि दरों में बढ़ोतरी होती है, तो नकद दर (कैश रेट) बढ़कर 3.85 प्रतिशत हो जाएगी। बाजार संकेतों के अनुसार, ब्याज दर बढ़ने की संभावना लगभग 75 प्रतिशत मानी जा रही है।
पिछले दो तिमाहियों में महंगाई दर अनुमान से अधिक रहने के बाद ब्याज दर बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है। दिसंबर 2025 तक के 12 महीनों में महंगाई दर 3.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जो केंद्रीय बैंक के लक्ष्य दायरे से ऊपर है।
महंगाई का एक अहम संकेतक माने जाने वाला “ट्रिम्ड मीन इन्फ्लेशन” भी बढ़कर 3.3 प्रतिशत हो गया है, जो यह दर्शाता है कि मूल्य दबाव अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं।
कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि हालिया महंगाई उछाल अस्थायी है। उनके अनुसार पिछले एक साल में महंगाई की गति धीमी हुई है और केंद्रीय बैंक को जल्दबाज़ी में फैसला नहीं लेना चाहिए।
विशेषज्ञों के मुताबिक:
बिजली की थोक कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मज़बूत हुआ है, जिससे आयात सस्ता हुआ
रोज़गार बाज़ार में तकनीकी बदलावों और एआई के कारण अनिश्चितता बनी हुई है
हाल ही में ब्याज दरों में कटौती के बाद फिर से बढ़ोतरी से नीति अस्थिरता का खतरा है
वहीं दूसरी ओर, कई विशेषज्ञ मानते हैं कि अर्थव्यवस्था मज़बूत हो रही है और बेरोज़गारी दर घटकर 4.1 प्रतिशत पर आ गई है। रोज़गार बढ़ने से उपभोक्ता खर्च में इज़ाफ़ा होता है, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है।
उनका कहना है कि यदि केंद्रीय बैंक ने समय रहते कदम नहीं उठाया, तो महंगाई को नियंत्रित करना और मुश्किल हो सकता है।
यदि ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती है, तो होम लोन की मासिक किश्तें बढ़ेंगी, जिससे पहले से महंगाई से जूझ रहे परिवारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
अब सबकी निगाहें आज होने वाली आरबीए की बैठक पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था के लिए अगला कदम सख्ती का होगा या धैर्य का।