कार्ड पेमेंट सुधार में आरबीए का नया संकेत, उपभोक्ताओं को सालाना 1.2 अरब डॉलर की बचत संभव

कार्ड पेमेंट सुधार में आरबीए का नया संकेत, उपभोक्ताओं को सालाना 1.2 अरब डॉलर की बचत संभव

सिडनी। रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया (RBA) ने कार्ड पेमेंट सर्चार्ज सुधार को लेकर अपने परामर्श की शुरुआती रिपोर्ट जारी की है। बैंक का दावा है कि इस सुधार से उपभोक्ताओं को हर साल करीब 1.2 अरब डॉलर (लगभग 96 अरब रुपये) की सीधी बचत हो सकती है।

गुरुवार को हुई पेमेंट सिस्टम बोर्ड की बैठक के बाद जारी बयान में आरबीए ने बताया कि छोटे कार्ड जारीकर्ताओं और फिनटेक कंपनियों के लिए नियमों में छूट देने पर विचार किया जा रहा है। बोर्ड सदस्यों ने माना कि प्रस्तावित नियमों का असर छोटे प्रदाताओं की प्रतिस्पर्धा और नवाचार क्षमता पर पड़ सकता है। फिलहाल इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है और परामर्श प्रक्रिया जारी रहेगी।

जुलाई में दिया था बड़ा प्रस्ताव

जुलाई में आरबीए ने डेबिट और क्रेडिट कार्ड पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क (सर्चार्ज) को खत्म करने का प्रस्ताव रखा था। गवर्नर मिशेल बुलॉक ने कहा था कि अब समय आ गया है कि भुगतान प्रणाली में मौजूद ऊँचे खर्च और अक्षमताओं को दूर किया जाए। उन्होंने दावा किया कि यह कदम भुगतान को सरल बनाएगा, प्रतिस्पर्धा बढ़ाएगा और उपभोक्ताओं के लिए बड़ी बचत लेकर आएगा।

आलोचनाएँ और महंगाई का खतरा

हालांकि, आलोचकों का कहना है कि व्यापारी इन खर्चों को कीमतों में जोड़ देंगे। आरबीए की रिपोर्ट के मुताबिक यदि व्यापारी ऐसा करते हैं तो महंगाई 0.1 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जो व्यापारी डेबिट कार्ड पर सर्चार्ज लगाते हैं, उन्हें या तो कीमतें बढ़ानी पड़ेंगी या फिर अपनी मार्जिन से यह लागत उठानी होगी।

छोटे कारोबारियों की नाराज़गी

इंडिपेंडेंट पेमेंट फ़ोरम (IPF), जिसमें एक लाख से अधिक छोटे व्यवसाय शामिल हैं, ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है। फ़ोरम ने कहा कि इस कदम से उपभोक्ताओं को भले ही राहत मिले, लेकिन छोटे कारोबारियों के लिए यह भारी नुकसानदायक होगा। IPF का कहना है कि बड़ी कंपनियों के पास लागत वहन करने की क्षमता है, लेकिन छोटे कारोबारियों पर यह बोझ कीमतों में वृद्धि या नौकरियों में कटौती के रूप में सामने आएगा।

आगे की राह

आरबीए ने साफ किया है कि सभी पक्षों से राय लेने के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा। केंद्रीय बैंक का लक्ष्य है कि उपभोक्ताओं को राहत दी जाए, साथ ही छोटे प्रदाताओं और कारोबारियों के हितों की भी रक्षा की जाए।