गोरखपुर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राष्ट्रव्यापी जन-जागरूकता अभियान की तैयारी में जुट गया है। संघ ने विजयदशमी (2 अक्टूबर 2025) से लगातार एक वर्ष तक सात प्रकार के विशेष कार्यक्रमों का आयोजन करने की घोषणा की है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख सुभाष जी ने बताया कि इस भव्य अभियान में पथ संचलन, घर-घर सम्पर्क अभियान, हिंदू सम्मेलन, सामाजिक सद्भाव बैठकें, प्रमुख जन गोष्ठियां, युवा कार्यक्रम और शाखा विस्तार जैसे आयोजन शामिल होंगे।
2 से 15 अक्टूबर 2025 तक गणवेशधारी स्वयंसेवकों का पथ संचलन आयोजित किया जाएगा।
2 नवम्बर से 2 दिसम्बर 2025 तक चलेगा घर-घर सम्पर्क अभियान, जिसे अब तक का दुनिया का सबसे बड़ा सम्पर्क अभियान बताया जा रहा है।
15 दिसम्बर 2025 से 15 जनवरी 2026 तक देशभर में हिंदू सम्मेलन होंगे।
फरवरी 2026 में विभिन्न मतों और पंथों के प्रमुखों के साथ सामाजिक सद्भाव कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सुभाष जी ने कहा कि संघ अपने स्वयंसेवकों के माध्यम से पिछले 100 वर्षों से व्यक्ति निर्माण के जरिए राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रहा है। अब तक संगठन वैचारिकी, शिक्षा, सेवा, सुरक्षा, सामाजिक और आर्थिक—इन छह क्षेत्रों में कार्य कर राष्ट्रोत्थान की दिशा में आगे बढ़ता रहा है।
संघ ने शताब्दी वर्ष के अवसर पर ‘पंच परिवर्तन’ का भी संकल्प लिया है। इसके पांच आयाम हैं—
सामाजिक समरसता : जाति-भेद मिटाकर भाईचारा बढ़ाना, अनुसूचित जाति-जनजाति समाज के साथ सहभागिता और त्योहारों में परस्पर शामिल होना।
कुटुंब प्रबोधन : परिवार की एकता, परंपरागत मूल्यों और संस्कारों का संवर्धन।
पर्यावरण : प्रकृति संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन पर बल।
स्व का बोध : आत्मगौरव और भारतीय सांस्कृतिक पहचान का विकास।
नागरिक कर्तव्य : जिम्मेदार नागरिक के रूप में कर्तव्यों का निर्वहन।
क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख ने कहा कि सामाजिक सद्भाव, भाईचारा और परिवार की मजबूती संघ की प्राथमिकताओं में शामिल हैं। सामूहिक पूजा, महापुरुषों की चर्चा और नित्य संवाद से परिवारों को संस्कारित और मजबूत बनाने की योजना पर काम होगा।
👉 यह सम्पर्क अभियान न केवल संघ के लिए, बल्कि भारतीय समाज के लिए भी एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है, जिसमें सामाजिक एकता और राष्ट्रीय जागरूकता पर विशेष जोर रहेगा।