महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन होंगे एनडीए के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार

महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन होंगे एनडीए के उपराष्ट्रपति उम्मीदवार

नई दिल्ली। भाजपा ने अपने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर महाराष्ट्र के राज्यपाल और तमिलनाडु के वरिष्ठ नेता सी.पी. राधाकृष्णन के नाम का ऐलान कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहा कि राधाकृष्णन का चार दशक लंबा राजनीतिक अनुभव और जमीनी कार्यशैली उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाती है।

एनडीए की रणनीति और समीकरण

राधाकृष्णन को नामित करने के बाद भाजपा ने उम्मीद जताई है कि चुनाव सर्वसम्मति से होंगे। उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को प्रस्तावित है। संसद के दोनों सदनों की कुल ताकत 786 है और बहुमत का आंकड़ा 394 है। एनडीए के पास लोकसभा में 293 और राज्यसभा में 129 सदस्य यानी कुल 422 का आंकड़ा है। इस लिहाज से एनडीए उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी का संदेश

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “थिरु सी.पी. राधाकृष्णन जी ने सार्वजनिक जीवन में अपने समर्पण, विनम्रता और बुद्धिमत्ता से अलग पहचान बनाई है। उन्होंने हमेशा समाजसेवा और वंचित वर्गों को सशक्त करने पर ध्यान दिया है।”

राजनीतिक संकेत और तमिलनाडु पर फोकस

राधाकृष्णन का चयन भाजपा की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। तमिलनाडु में अगले वर्ष चुनाव हैं और भाजपा अभी तक वहां मजबूत आधार नहीं बना सकी है। ऐसे में तमिलनाडु से जुड़े नेता को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाकर पार्टी ने विपक्षी द्रविड़ पार्टियों – डीएमके और एआईएडीएमके – को सीधे संदेश देने की कोशिश की है।
एआईएडीएमके ने इस फैसले को भाजपा का “समावेशी रुख” बताया, वहीं डीएमके ने आरोप लगाया कि भाजपा तमिलनाडु के हितों की अनदेखी कर रही है।

धांधकर से अलग छवि

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को विवादों और विपक्ष से टकराव की वजह से पद से हटना पड़ा था। राधाकृष्णन इसके बिल्कुल उलट सहमति और संवाद से काम करने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं।
17 वर्ष की आयु से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं। वे दो बार कोयंबटूर से सांसद रहे, भाजपा की तमिलनाडु इकाई का नेतृत्व किया, झारखंड के राज्यपाल और पुडुचेरी के प्रभारी भी रह चुके हैं।

विपक्ष की प्रतिक्रिया

डीएमके प्रवक्ता ने कहा कि “तमिलनाडु से किसी को नामित करना अच्छी बात है। दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व केंद्र सरकार में कम है। उम्मीद है कि वे राज्यसभा में सबके साथ न्याय करेंगे।”