लंदन। ब्रिटेन में जारी अभूतपूर्व महंगाई और बढ़ते टैक्स बोझ के बीच अब शाही परिवार के खर्चों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। राजा चार्ल्स तृतीय के शासन में राजघराने पर होने वाला कुल वार्षिक खर्च लगभग 1 बिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (करीब ₹6,000 करोड़) होने का अनुमान है। यह दावा राजपरिवार की वित्तीय व्यवस्थाओं का लंबे समय से अध्ययन कर रहे विशेषज्ञ नॉर्मन बेकर ने किया है।
यह राशि ब्रिटिश जनता पर प्रति दिन लगभग $2.7 मिलियन का बोझ बनती है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान में कार्यरत केवल 10 वरिष्ठ शाही सदस्यों को देखते हुए यह खर्च असामान्य रूप से अधिक है।
2011 में ‘सिविल लिस्ट’ प्रणाली की जगह लागू की गई सॉवरिन ग्रांट के तहत शाही परिवार को सरकारी खर्चों के लिए धन मिलता है।
वर्ष 2025 में यह ग्रांट $262 मिलियन तक पहुँच गई।
2011 की तुलना में यह कई गुना अधिक है।
इस ग्रांट में महलों का रखरखाव, आधिकारिक यात्राएं, कर्मचारियों के वेतन और सुरक्षा सहित कई प्रकार के खर्च शामिल हैं।
हाल के खुलासों ने विवाद को और गहरा दिया है।
प्रिंस एंड्रयू और प्रिंस एडवर्ड सहित कई शाही सदस्य किराए पर शाही संपत्तियों में बेहद कम राशि देकर रह रहे हैं।
यह संपत्तियां क्राउन एस्टेट के अधीन आती हैं, जिनकी आय का बड़ा हिस्सा जनता की भलाई के लिए सरकारी कोष में जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि “मार्केट रेट” पर किराया न लेने से सरकारी राजस्व को नुकसान होता है।
ब्रिटेन की संसद ने शाही संपत्ति लीज़ व्यवस्थाओं की जांच के लिए विशेष समिति गठित करने की घोषणा की है।
राजा चार्ल्स की निजी संपत्ति का अनुमान 4 बिलियन डॉलर से अधिक लगाया जा रहा है। उन्हें अपनी मां दिवंगत रानी एलिज़ाबेथ द्वितीय से विशाल संपत्ति, कला संग्रह, घोड़े और आभूषण विरासत में मिले।
वहीं,
इनकम टैक्स शाही सदस्यों के लिए अनिवार्य नहीं, वे चाहें तो स्वेच्छा से भरते हैं।
पूँजीगत लाभ कर, कॉरपोरेशन टैक्स और उत्तराधिकार कर से भी वे मुक्त हैं।
प्रिंस विलियम द्वारा नियंत्रित डची ऑफ कॉर्नवॉल, जिसकी संपत्ति का मूल्य लगभग $2.2 बिलियन है, पहले लाइफबोट स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक सेवाओं से किराया वसूलने को लेकर विवादों में रह चुका है।
ब्रिटेन सरकार शाही परिवार और महलों की सुरक्षा पर हर साल $300–400 मिलियन खर्च करती है।
इसके अलावा:
रानी एलिज़ाबेथ के अंतिम संस्कार पर करीब $364 मिलियन,
और राजा चार्ल्स के राज्याभिषेक समारोह पर लगभग $144 मिलियन खर्च हुए।
बकिंघम पैलेस के व्यापक नवीनीकरण पर भी अब तक हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं और काम वर्ष 2027 तक जारी रहने का अनुमान है।
लगातार बढ़ते खर्चों और महंगाई के दबाव के बीच ब्रिटेन में राजशाही के प्रति समर्थन रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर पहुँच गया है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जनता अभी भी यह निश्चित नहीं है कि राजशाही का विकल्प क्या हो सकता है।
फिर भी, सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग अब पहले से अधिक मुखर हो चुकी है, और आने वाले वर्षों में राजपरिवार की वित्तीय व्यवस्थाओं पर संसद की निगरानी और कड़ी हो सकती है।