कीव/मॉस्को। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा युद्ध और अधिक भयानक होता जा रहा है। 12 जुलाई को रूस ने यूक्रेन पर अब तक का सबसे बड़ा और समन्वित हमला किया। इस हमले में रूस ने लगभग 700 ड्रोन, 10 बॉम्बर विमानों, और दर्जनों मिसाइलों का इस्तेमाल किया। हमला इतना व्यापक था कि यूक्रेन की वायुसेना और रडार सिस्टम पर एक साथ कई दिशाओं से हमला हुआ।
रूसी हमले का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी हथियारों और उनके भंडारण स्थलों को निशाना बनाना था। रिपोर्टों के मुताबिक, रूस ने यूक्रेन के पश्चिमी और मध्य भागों में स्थित हथियार डिपो, हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जहां अमेरिका और अन्य नाटो देशों द्वारा भेजे गए हथियार संग्रहित थे।
यूक्रेन की वायुसेना के प्रवक्ता ने बताया कि यह हमला "अभूतपूर्व स्तर" का था और इसका उद्देश्य यूक्रेन की रक्षा क्षमता को पंगु करना था। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेनी वायु रक्षा ने दर्जनों ड्रोन और मिसाइलों को बीच में ही नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइलें अपने लक्ष्यों तक पहुंचने में सफल रहीं।
हमले के दौरान कीव, लविव और खारकीव समेत कई शहरों में सायरन बज उठे और नागरिकों को बंकरों में शरण लेने के निर्देश दिए गए। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हुई और कुछ अस्पतालों को भी नुकसान पहुंचा।
इस हमले के बाद अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस की आलोचना करते हुए कहा कि यह हमला नागरिकों की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डालता है। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि वह यूक्रेन की मदद जारी रखेगा और अतिरिक्त रक्षा सहायता पर विचार कर रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला रूस की एक नई रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह यूक्रेन के अंदर अमेरिकी और नाटो देशों के हथियारों को खत्म कर युद्ध की दिशा को बदलना चाहता है। यह हमला भविष्य के और भी बड़े सैन्य टकराव का संकेत माना जा रहा है।
यह हमला यूक्रेन के लिए केवल एक सैन्य चुनौती नहीं, बल्कि उसकी रणनीतिक सुरक्षा क्षमता पर एक बड़ा खतरा है। आने वाले दिनों में यह युद्ध और अधिक उग्र रूप ले सकता है।