प्रदूषण से निपटने पर सुप्रीम कोर्ट का जोर

“रोज़गार छीने बिना प्रदूषण घटाने के ठोस उपाय खोजे जाएं”

प्रदूषण से निपटने पर सुप्रीम कोर्ट का जोर

नई दिल्ली, 17 सितंबर 2025।
दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि प्रदूषण रोकना बेहद ज़रूरी है, लेकिन इसके लिए ऐसे कदम नहीं उठाए जाने चाहिए जिनसे दिहाड़ी मजदूरों और प्रवासी श्रमिकों की आजीविका पर सीधा संकट आ जाए। कोर्ट ने साफ कर दिया कि सर्दियों में निर्माण कार्यों पर पूर्ण प्रतिबंध का रास्ता उचित नहीं है।

कोर्ट ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा—

  • मजदूर सबसे अधिक प्रभावित: निर्माण कार्य रुकने पर सबसे ज्यादा नुकसान उन श्रमिकों को होता है जो रोज़गार के लिए दूसरे राज्यों से दिल्ली आते हैं।

  • मुआवजा समय पर नहीं: पिछले वर्षों में जब निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाई गई, तो श्रमिकों को मुआवजा या तो समय पर नहीं मिला या पर्याप्त नहीं मिला।

  • प्रतिबंध समाधान नहीं: केवल रोक लगाने से समस्या का हल नहीं होगा। प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस और दीर्घकालिक कदम जरूरी हैं।

CAQM को मिले निर्देश

पीठ ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को निर्देश दिया है कि वह सभी राज्यों और संबंधित हितधारकों से बातचीत कर अगले तीन सप्ताह के भीतर ठोस योजनाएं तैयार करे। अदालत ने कहा कि ऐसे विकल्प तलाशे जाएं जिनसे निर्माण कार्य बंद न करना पड़े, लेकिन प्रदूषण पर भी प्रभावी रोक लगे।

मजदूरों के लिए राहत

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उन हजारों मजदूरों के लिए राहत लेकर आई है, जिनकी रोज़ी-रोटी हर साल सर्दियों में निर्माण बंदी के कारण छिन जाती है। अदालत ने माना कि अब तक दिया गया मुआवजा न तो पर्याप्त रहा और न ही समय पर पहुंचा।

प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती

दिल्ली-एनसीआर हर साल सर्दियों में गंभीर वायु प्रदूषण की चपेट में आ जाता है। स्मॉग, धूल और पराली जलाने जैसे कारक हवा को जहरीला बना देते हैं। अब सवाल यह है कि बिना निर्माण कार्य रोके सरकार और एजेंसियां किन वैकल्पिक उपायों पर सहमति बनाएंगी।

आगे की राह

  • तीन सप्ताह में CAQM को राज्यों के साथ मिलकर योजना बनानी होगी।

  • मजदूरों की आजीविका बचाते हुए प्रदूषण कम करने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक उपाय सुझाए जाएंगे।

  • अदालत ने यह भी संकेत दिया है कि वह मुआवजे की प्रक्रिया की निगरानी करेगी, ताकि श्रमिकों के साथ अन्याय न हो।