तियानजिन (चीन), 1 सितम्बर।
शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के सदस्य देशों ने चीन के तियानजिन में आयोजित शिखर सम्मेलन में जारी संयुक्त घोषणापत्र में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। घोषणापत्र में स्पष्ट कहा गया कि 22 अप्रैल 2025 को हुए इस हमले के दोषियों, योजनाकारों और सहयोगियों को हर हाल में सजा दिलाई जानी चाहिए। सदस्य देशों ने मृतकों और घायलों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
तियानजिन घोषणा में कहा गया कि आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद किसी भी स्वरूप में स्वीकार्य नहीं है। सदस्य देशों ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवादी संगठनों का किसी भी देश द्वारा अपने निजी या राजनीतिक स्वार्थों के लिए उपयोग नहीं होना चाहिए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में दोहरे मापदंड अस्वीकार्य हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सीमा पार आतंकवाद सहित सभी रूपों में इसका मुकाबला करना चाहिए।
घोषणापत्र में भारत की हाल की पहलों का जिक्र करते हुए सराहना की गई। इसमें अप्रैल 2025 में नई दिल्ली में आयोजित 5वें एससीओ स्टार्टअप मंच और मई 2025 में हुई 20वीं एससीओ थिंक टैंक बैठक को महत्वपूर्ण बताया गया। सदस्य देशों ने भारतीय विश्व मामलों की परिषद (आईसीडब्ल्यूए) के तहत कार्यरत एससीओ अध्ययन केंद्र की भी सराहना की, जिसने सांस्कृतिक और मानवीय आदान-प्रदान को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।
घोषणापत्र में ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ के संदेश को दोहराया गया और कहा गया कि यह विचार वैश्विक शांति और सतत विकास की कुंजी है। सदस्य देशों ने आतंकवाद और उग्रवाद से लड़ने के लिए आपसी सहयोग को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया।
👉 इस प्रकार, तियानजिन में हुआ यह सम्मेलन न केवल पहलगाम आतंकी हमले पर सख्त प्रतिक्रिया लेकर आया, बल्कि सीमा पार आतंकवाद पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होने का संदेश देता है।