पश्चिम बंगाल में SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद अब न्यायिक मोर्चे तक पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ममता बनर्जी का कहना है कि वह इस मामले में “एक आम नागरिक” के तौर पर अदालत पहुंची हैं।
इस कदम पर कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि बंगाल में SIR लागू होने से पहले ममता बनर्जी ने जोरदार ऐलान किया था कि राज्य में इसे किसी भी हाल में लागू नहीं होने दिया जाएगा। अधीर रंजन ने आरोप लगाया कि उस समय उनकी पार्टी की ओर से धमकी भरे बयान भी आए थे और सरकारी कर्मचारियों पर दबाव बनाया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब SIR की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है, तो ममता बनर्जी ने शुरुआत में ही सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला क्यों नहीं लिया।
इधर, ममता बनर्जी सरकार और केंद्र सरकार के बीच जारी खींचतान ने एक और कानूनी मोड़ ले लिया है। पश्चिम बंगाल सरकार ने सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाए जाने के केंद्र के फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
दरअसल, केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना जारी कर पंजाब, पश्चिम बंगाल और असम जैसे सीमावर्ती राज्यों में BSF के अधिकार क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय सीमा से 15 किलोमीटर से बढ़ाकर 50 किलोमीटर कर दिया है। इसके तहत BSF को अब सीमा से 50 किलोमीटर अंदर तक तलाशी, जब्ती और गिरफ्तारी की शक्तियां मिल गई हैं।
ममता बनर्जी का तर्क है कि यह फैसला भारत के संघीय ढांचे पर सीधा हमला है और इससे राज्यों के अधिकारों का हनन होता है। वहीं, केंद्र सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है। सीमा पार से घुसपैठ, नशीले पदार्थों की तस्करी और ड्रोन के जरिए होने वाली अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए BSF को अधिक परिचालन स्वतंत्रता देना जरूरी है।
केंद्र का यह भी दावा है कि इस फैसले से राज्य पुलिस की शक्तियों में कोई कमी नहीं आएगी, बल्कि राज्य पुलिस और BSF मिलकर बेहतर समन्वय के साथ काम कर सकेंगी। अब इन दोनों ही मामलों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार किया जा रहा है।