कैनबरा, 18 फरवरी 2026
ऑस्ट्रेलिया की संसद में बीयर और गैस पर लगने वाले कर को लेकर हुई तीखी बहस ने पूरे देश में नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। सीनेट की एक सुनवाई के दौरान यह खुलासा हुआ कि सरकार को बीयर पर लगने वाले टैक्स से पेट्रोलियम रिसोर्स रेंट टैक्स (PRRT) की तुलना में ज्यादा राजस्व मिल रहा है।
स्वतंत्र सीनेटर डेविड पोकॉक ने ट्रेजरी के डिप्टी सेक्रेटरी शेन जॉनसन से सवाल किया कि क्या यह सही है कि ऑफशोर गैस निर्यात से मिलने वाला PRRT राजस्व, बीयर पर लगने वाले कर से कम है। जवाब में अधिकारियों ने बताया कि 2025-26 में बीयर से लगभग 2.7 अरब डॉलर टैक्स मिलने का अनुमान है, जबकि PRRT से करीब 1.5 अरब डॉलर।
इस पर पोकॉक ने हैरानी जताते हुए कहा कि “हम दुनिया के सबसे बड़े गैस निर्यातकों में से एक हैं, फिर भी बीयर से ज्यादा टैक्स और गैस से कम — यह कैसे संभव है?”
पेट्रोलियम रिसोर्स रेंट टैक्स (PRRT) एक 40 प्रतिशत कर है, जो तेल, गैस और एलपीजी जैसी पेट्रोलियम परियोजनाओं के “सुपर-प्रॉफिट” यानी अतिरिक्त मुनाफे पर लगाया जाता है। हालांकि यह टैक्स केवल शुद्ध लाभ पर लागू होता है, जिससे कंपनियां विभिन्न कटौतियों के बाद कम कर देती हैं।
इस बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और इसे 80 लाख से अधिक बार देखा जा चुका है। कई मतदाताओं ने बड़ी ऊर्जा कंपनियों से “उचित हिस्सा” वसूलने की मांग तेज कर दी है।
हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, कुछ मतदाता समूह गैस कंपनियों पर 25 प्रतिशत का फ्लैट निर्यात कर लगाने के पक्ष में हैं। यह मुद्दा अब राजनीतिक दलों के बीच भी चर्चा का केंद्र बन गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा आगामी चुनावों में बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है। विपक्षी दल और स्वतंत्र सांसद सरकार से ऊर्जा क्षेत्र में कर ढांचे की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
इस घटनाक्रम ने यह सवाल फिर से खड़ा कर दिया है कि क्या ऑस्ट्रेलिया अपनी प्राकृतिक संपदाओं से पर्याप्त राजस्व हासिल कर पा रहा है, या कर प्रणाली में सुधार की जरूरत है।