बोलीं शेख हसीना : “यूनुस सरकार अवैध, अल्पसंख्यकों पर हमले राजनीति से प्रेरित”

बोलीं शेख हसीना : “यूनुस सरकार अवैध, अल्पसंख्यकों पर हमले राजनीति से प्रेरित”

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को दिए अपने सबसे तीखे इंटरव्यू में अंतरिम सरकार और मौजूदा हालात पर गहरी चिंता जताई है। नई दिल्ली स्थित अपने सुरक्षित आवास से उन्होंने आरोप लगाया कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर कर रही है और देश “निरंकुशता तथा चरमपंथी प्रभाव” की ओर धकेला जा रहा है।

हसीना ने पहली बार विस्तार से बताया कि 5 अगस्त 2024 को सत्ता से हटाए जाने के बाद बांग्लादेश में कैसी अराजक स्थिति बनी और किस परिस्थिति में उन्हें देश छोड़ना पड़ा।


“छात्र आंदोलन को लोकतंत्र-विरोधी ताकतों ने हाईजैक कर लिया”

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा कि जिन छात्र प्रदर्शनों की शुरुआत वैध और जिम्मेदार सवालों से हुई थी, उन्हें बहुत जल्द ही ऐसी शक्तियों ने अपने हाथ में ले लिया जिनका उद्देश्य “लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करना” था।

हसीना के अनुसार—

“हिंसा, डर और झूठे प्रचार के सहारे चुनी हुई सरकार को हटाने की सुनियोजित साज़िश रची गई। हालात इतने बिगड़ गए कि अपने परिवार की सुरक्षा के लिए मुझे ढाका छोड़ना पड़ा। यह मेरे जीवन का सबसे पीड़ादायक फैसला था।”


“मेरे परिवार का ऐतिहासिक घर निशाना बनाया गया”

उन्होंने बताया कि सत्ता से हटाए जाने के बाद उग्र भीड़ ने उनके परिवार की विरासत से जुड़े स्थानों को नुकसान पहुंचाया।
उनका कहना था कि यह सिर्फ राजनीतिक प्रतिशोध नहीं था, बल्कि “देश की बहुलवादी संस्कृति और हमारी विकास यात्रा पर सीधा हमला” था।


अल्पसंख्यकों पर हमलों को बताया “राजनीति प्रेरित हिंसा”

शेख हसीना ने दावा किया कि अंतरिम शासन के दौरान अल्पसंख्यक समुदायों पर हुए हमले न केवल राज्य की चुप्पी से बढ़े, बल्कि “कुछ तत्वों ने इन्हें राजनीतिक संदेश बनाने के लिए प्रायोजित” किया।

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा—

“बांग्लादेश को ऐसे रास्ते पर ले जाया जा रहा है जहाँ चरमपंथी ताकतें निर्णय लेने लगती हैं। यह देश के भविष्य के लिए बेहद खतरनाक है।”


“लोकतांत्रिक वैधता की लड़ाई जारी रहेगी”

पूर्व प्रधानमंत्री ने स्पष्ट कहा कि उनका संघर्ष किसी पद के लिए नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली के लिए है।
उनके अनुसार—

“बांग्लादेश के लोग एक शांतिपूर्ण, स्थिर और प्रगतिशील देश चाहते हैं। उनकी यह इच्छा किसी भी साजिश से बड़ी है और यही मुझे उम्मीद देती है।”