नई दिल्ली/ह्यूस्टन, 26 जून 2025 —
भारत के युवा वैज्ञानिक और स्पेस पायनियर शुभांशु शुक्ला के नेतृत्व में शुरू हुआ ‘मिशन स्पेस’ ऐतिहासिक रूप से सफल रहा। बुधवार रात भारतीय समयानुसार लगभग 8:30 बजे उनका अंतरिक्ष यान सफलतापूर्वक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से जुड़ गया। इस डॉकिन्ग प्रक्रिया को दुनिया भर में लाइव प्रसारित किया गया और यह पूरी तरह सुरक्षित एवं नियोजित तरीके से संपन्न हुई।
मिशन में शामिल चारों एस्ट्रोनॉट्स अब अगले 14 दिनों तक अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में वैज्ञानिक अनुसंधान और प्रयोग करेंगे। इस दौरान वे पृथ्वी के वायुमंडलीय डेटा, ग्रैविटी के असर, और कई जैविक परीक्षणों पर काम करेंगे।
यह मिशन भारत, अमेरिका और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के सहयोग से संचालित हो रहा है।
स्पेसक्राफ्ट ने सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में प्रवेश कर लिया और 40 मिनट में डॉकिन्ग पूरा किया।
शुभांशु शुक्ला ने टेक-ऑफ से लेकर ISS में एंट्री तक की कमान खुद संभाली।
इस मिशन को भारत के लिए ‘न्यू स्पेस एज’ की शुरुआत माना जा रहा है।
शुभांशु शुक्ला उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं और उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और बाद में नासा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों के लिए एक प्रेरणा के रूप में अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की भागीदारी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
विज्ञान मंत्री का बयान:
भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने इस मिशन को "भारत की वैज्ञानिक क्षमता और वैश्विक सहयोग का प्रतीक" बताया और शुभांशु को बधाई दी।
आगामी एजेंडा:
अगले दो सप्ताह में मिशन दल करीब 17 वैज्ञानिक प्रयोग, डिजिटल स्पेस कम्युनिकेशन टेस्ट, और जीरो ग्रैविटी में मानव शरीर के व्यवहार पर परीक्षण करेगा। इसके बाद वापसी यात्रा शुरू होगी।
यह मिशन न केवल भारत के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक बड़ा वैज्ञानिक कदम माना जा रहा है।