बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार गंभीर रूप लेती जा रही हैं। ताजा मामला नरसिंदी जिले के पोलाश उपजिला क्षेत्र का है, जहाँ एक प्रतिष्ठित हिंदू किराना व्यवसायी की धारदार हथियारों से हमला कर हत्या कर दी गई। इस घटना के साथ ही बीते कुछ दिनों में मारे गए हिंदुओं की संख्या छह हो गई है, जिससे देश में सांप्रदायिक तनाव और गहरा गया है।
पुलिस और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, 5 जनवरी की रात लगभग 10 बजे चोरसिंदूर बाजार में किराना दुकान चलाने वाले मोनी चक्रवर्ती पर अज्ञात हमलावरों ने अचानक धारदार हथियारों से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल मोनी चक्रवर्ती को स्थानीय लोग तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। वे मदन चक्रवर्ती के बड़े पुत्र थे और इलाके में एक सम्मानित व्यापारी के रूप में पहचाने जाते थे।
इससे पहले जशोर जिले के मनीरामपुर क्षेत्र में पत्रकार राणा प्रताप बैरागी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, मोटरसाइकिल सवार हमलावर उन्हें उनकी बर्फ फैक्ट्री से बाहर बुलाकर पास की गली में ले गए, जहाँ कहासुनी के बाद उनके सिर में गोलियां मार दी गईं। यह वारदात दिनदहाड़े हुई, जिससे इलाके में भय का माहौल फैल गया।
हालिया घटनाओं में जिन हिंदुओं की हत्या हुई है, उनमें मोनी चक्रवर्ती और राणा प्रताप बैरागी के अलावा दीपू दास, अमृत मंडल, बजेंद्र विश्वास और खोकोन दास शामिल हैं।
दीपू दास की हत्या कथित ईशनिंदा के आरोप में की गई।
खोकोन दास पर भीड़ ने हमला कर पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया था, जिनकी बाद में अस्पताल में मौत हो गई।
लगातार हो रही इन हत्याओं के बाद हिंदू समुदाय में गहरा भय व्याप्त है। स्थानीय समुदाय और मानवाधिकार संगठनों ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग तेज कर दी है। पुलिस का कहना है कि सभी मामलों की जांच जारी है, लेकिन अब तक किसी भी मामले में ठोस गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
इन घटनाओं ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।