कैनबरा, प्रतिनिधि।
ऑस्ट्रेलिया की राजनीति में इन दिनों प्रवासी भारतीयों को लेकर दिए गए बयान पर नया विवाद खड़ा हो गया है। लिबरल पार्टी की सीनेटर जैसिंटा नम्पिजिन्पा प्राइस ने अपने हालिया वक्तव्य पर सफाई देते हुए साफ़ कहा है कि उन्होंने जो कहा, उसके लिए उन्हें किसी भी तरह की माफी माँगने की ज़रूरत नहीं है। उनके इस बयान ने पार्टी के अंदर और बाहर दोनों ही जगह हलचल मचा दी है।
सीनेटर प्राइस ने भारतीय प्रवासियों पर टिप्पणी करते हुए कुछ ऐसे विचार रखे थे, जिन्हें लेकर व्यापक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जहाँ एक ओर उनके समर्थक इसे “स्पष्टवादिता” बता रहे हैं, वहीं आलोचक इसे “ग़ैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी” मान रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि लिबरल पार्टी की नेता के इस रुख़ से विपक्ष के भीतर अनुशासन और एकता पर सवाल उठ सकते हैं।
लिबरल पार्टी की डिप्टी लीडर सुसान लेह को पत्रकारों और राजनीतिक विरोधियों के सवालों का लगातार सामना करना पड़ रहा है। मीडिया और संसद दोनों ही जगह उनसे पूछा जा रहा है कि क्या पार्टी प्राइस के विचारों से सहमत है या नहीं।
सुसान लेह अब एक कठिन स्थिति में हैं—यदि वे प्राइस का समर्थन करती हैं तो प्रवासी समुदाय नाराज़ हो सकता है, और यदि वे उनसे दूरी बनाती हैं तो पार्टी के अंदर मतभेद की तस्वीर और साफ़ हो जाएगी।
भारतीय प्रवासी समुदाय, जो ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन में अहम भूमिका निभाता है, इस पूरे विवाद पर चिंतित है। उनका कहना है कि ऐसे बयानों से समाज में विभाजन और गलतफहमी फैल सकती है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस मुद्दे का असर लिबरल पार्टी की भविष्य की रणनीति और प्रवासी समुदाय से उसके रिश्तों पर गहरा पड़ सकता है।
अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि विपक्ष इस संकट से कैसे निपटता है। क्या पार्टी अपने नेता के बयान का बचाव करेगी या फिर अनुशासनात्मक कार्रवाई का रास्ता अपनाएगी—यह आने वाले दिनों में साफ़ हो जाएगा।