भारत के सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) से संबंध रखने के बावजूद किसी अन्य धर्म—जैसे ईसाई या मुस्लिम—को अपनाता है, तो वह अपना SC दर्जा खो देता है। अदालत ने इस मामले में आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है।
यह मामला एक ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था, जिसने ईसाई धर्म अपना लिया था और पादरी (Pastor) के रूप में कार्य कर रहा था। उसने कुछ लोगों के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत केस दर्ज कराया था।
आरोपियों ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता अब ईसाई धर्म अपना चुका है, इसलिए वह SC/ST कानून के तहत मिलने वाले संरक्षण का हकदार नहीं है।
30 अप्रैल 2025 को आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा:
इसके खिलाफ याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा:
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि:
“यह महत्वपूर्ण नहीं है कि व्यक्ति बाद में अपने मूल धर्म में लौटा या नहीं, बल्कि यह देखा जाएगा कि घटना के समय वह किस धर्म का पालन कर रहा था।”
यह फैसला कई कारणों से अहम माना जा रहा है: