काठमांडू। नेपाल में लंबे राजनीतिक संकट और अशांति के बीच रविवार सुबह पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने सिंह दरबार में अंतरिम प्रधानमंत्री पद की शपथ ली और कार्यभार संभाल लिया। उनके नेतृत्व में बनी यह अंतरिम सरकार अब कैबिनेट के विस्तार की तैयारी में जुटी है। देशभर से कर्फ्यू हटाए जाने के बाद आम जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है।
कार्यभार संभालने के बाद पीएम कार्की ने साफ कहा, “मैं और मेरी टीम यहां सत्ता का स्वाद चखने नहीं आए हैं। हमारा मकसद केवल देश में स्थिरता बहाल करना और नई संसद के गठन तक व्यवस्था संभालना है। हम छह महीने से अधिक नहीं रुकेंगे।” उन्होंने हिंसा में शामिल लोगों की जांच का भी ऐलान किया और कहा कि 24 घंटे की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना, आर्थिक समानता और भ्रष्टाचार उन्मूलन उनकी पहली प्राथमिकता होगी।
सूत्रों के मुताबिक, कार्की गृह, विदेश और रक्षा जैसे अहम मंत्रालय अपने पास रख सकती हैं। हालांकि वे केवल 15 के आसपास मंत्रियों के साथ एक संक्षिप्त और प्रभावी मंत्रिमंडल बनाना चाहती हैं।
संभावित नाम:
कानूनी क्षेत्र से: ओम प्रकाश आर्यल
सुरक्षा क्षेत्र से: पूर्व मेजर जनरल बालानंद शर्मा
न्यायपालिका से: सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति आनंद मोहन भट्टाराई
तकनीकी विशेषज्ञ: ऊर्जा क्षेत्र के कुलमान घीसिंग
स्वास्थ्य क्षेत्र से: डॉ. भगवान कोइराला, डॉ. संदुक रुइत, डॉ. जगदीश अग्रवाल और डॉ. पुकार चंद्र श्रेष्ठ
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, जेनरेशन-ज़ेड के कार्यकर्ताओं ने भी ऑनलाइन वोटिंग के जरिए संभावित मंत्रियों पर अपनी राय दी है। अगर सहमति बनी तो रविवार शाम तक नया मंत्रिमंडल शपथ ले सकता है, अन्यथा यह प्रक्रिया सोमवार तक खिंच सकती है।
शपथ लेने के तुरंत बाद पीएम कार्की ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों में घायल हुए नागरिकों से अस्पताल जाकर मुलाकात की। शनिवार को भी उन्होंने सिविल अस्पताल जाकर घायलों का हालचाल लिया। इस कदम को उनकी संवेदनशील और ज़मीनी नेतृत्व शैली का संकेत माना जा रहा है।
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शुक्रवार को कार्की की सिफारिश पर प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया था। अब नेपाल में 5 मार्च 2026 को आम चुनाव कराए जाएंगे। अंतरिम सरकार का दायित्व केवल उस समय तक देश को स्थिरता की ओर ले जाना है।